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RS-28 Sarmat (Satan-2)

RS-28 Sarmat – नमस्कार दोस्तों कैसे हैं? आज के इस लेख में, में आपको रशियन मिसाइल- RS 28 के बारे में बताने वाला हूं। कि यह किस प्रकार की मिसाइल है और इसके क्या क्या फायदे हैं? जैसा कि आप सब जानते हैं कि हमेशा ही कोई ना कोई देश अपनी ताकत को बढ़ाने में दिन रात लगे रहते हैं ताकि उनका दबदबा विश्वभर में अन्य देशों पर बना रहे। भले ही वह किसी गलत तरीके से इसको प्रयोग न करते हो लेकिन शांति संतुलन बनाए रखने के लिए यह जरूरी होता है कि प्रत्येक देश अपनी ताकत को बढ़ाता रहे।

इसी तरह अभी हाल ही में रसिया यूक्रेन के युद्ध के दौरान ही रसिया ने अपनी अत्याधुनिक ताकत से लैस अपनी एक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है तो चलिए आइए जानते हैं क्या है इसकी खूबियां?

RS-28 Sarmat (Satan-2)
RS-28 Sarmat (Satan-2)

RS-28 Sarmat | विस्तृत जानकारी –

यह रसिया की एक आधुनिक सुपरहैवी इंटेरकॉन्टीनेंटल बलिस्टिक मिसाईल है। जो आधुनिक संसाधनों के लेस है। यह रूस की एक और नई सफलता है। इसको 20 अप्रैल वर्ष 2022 में लॉन्च किया गया तथा सेवा में प्रस्तुत किया गया। इसे सामरिक रॉकेट बल द्वारा इस्तेमाल किया जाएगा। इसे मेकयेव रॉकेट डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया। इसका द्रव्यमान 208.1 मीट्रिक टन है। इसकी लंबाई 35.5 मीटर है। इसका व्यास 3 मीटर है। इसकी मारक क्षमता 18000 किलोमीटर (11000 मील) के करीब है।

इसकी अधिकतम गति 25560 किलो/घंटा (15880 मील प्रति घंटा है) और पर सेकेंड के हिसाब से 7.1किलो/घंटा (4.4 मील/प्रति सेकेंड है)। वर्ष 2014 में रूस के एक सेन्य अधिकारी ने घोषणा की थी की सरमत की वर्ष 2020 तक तैयार होने की संभावना है। उसी वर्ष एक अन्य अधिकारीक स्रोत से यह भी बयान मिल की इस कार्यक्रम में और भी तेजी लायी जा रही है। 10 अगस्त 2016 को रूस ने PDU-99 नामक इस मिसाइल (RS-28) का प्रथम इंजन का सफलता पूर्वक परीक्षण किया था।

क्षमता –

RS-28 सरमत 10 भारी वारहेडस के लिए 10 टन पेलोड ले जाने के लिए अपने आप में सक्षम है। वर्ष 2018 में रूसी राष्ट्रपति पुतिन द्वारा अनावरण कीये गए जो मुख्य रूस के जो 6 रणनीतिक हथियार हैं उनमें से RS-28 सरमन एक है।

RS-28 Sarmat

हाइपरसोनिक हथियार क्या है?

एक हाइपरसोनिक हथियार ध्वनि की गति से 5 से पांच गुना तेज गति से यात्रा करता है। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें मौजूदा क्रूज मिसाइलों के समान हैं, जिसमें वे एक हवाई जहाज की तरह वायुगतिकीय लिफ्ट द्वारा खुद को बनाए रखती हैं, और पूरी उड़ान के दौरान संचालित होती हैं।

पैंतरेबाज़ी रीएंट्री वाहनों को बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह लॉन्च किया जाता है, लेकिन जब एक बैलिस्टिक मिसाइल वायुमंडल से ऊपर उठती है, तो पैंतरेबाज़ी करने वाले रीएंट्री वाहनों को एक प्रक्षेपवक्र पर रखा जाता है जो उन्हें बिना शक्ति के ग्लाइडिंग से पहले वातावरण में फिर से प्रवेश करने की अनुमति देता है। ड्राइव एंट्री – जैसे हैंग ग्लाइडर रीएंट्री वाहन, जो सैकड़ों या हजारों मील से भी ग्लाइड कर सकते हैं, बूस्ट-ग्लाइड वाहन कहलाते हैं।

रूस के नवीनतम मिसाइल प्रयासों का महत्व –

मार्च की शुरुआत में अपने भाषण में, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नए हथियारों की एक सूची जारी की जो रूस ने दावा किया था कि वे विकसित हो रहे थे या विकसित किए गए थे। इस सूची में कई हाइपरसोनिक क्षमताओं को शामिल किया गया था। सबसे महत्वपूर्ण एक बूस्ट-ग्लाइड हथियार है जिसे अवांगार्ड कहा जाता है।

पुतिन के अनुसार, इस युद्धाभ्यास हथियार को अमेरिकी मिसाइल रक्षा को हराने के लिए बनाया गया है। इसके बाद, रूस ने संकेत दिया है कि अवांगार्ड ग्लाइडर को कम से कम दो अलग-अलग प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइलों पर तैनात किया जाएगा और परमाणु हथियार भी ले जाएगा। माना जा रहा है कि भविष्य में इस हथियार का इस्तेमाल नॉन-न्यूक्लियर वॉरहेड्स की डिलीवरी के लिए किया जा सकता है। लेकिन वर्तमान में इसका एकमात्र उद्देश्य परमाणु हथियारों की डिलीवरी होना प्रतीत होता है।

क्या चीन भी इसी तरह की hypersonic missiles का परीक्षण और उपयोग कर रहा है ?

China भी Russia की तरह ही बूस्ट-ग्लाइड हथियार और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर रहा है। चीन एक ग्लाइडर विकसित कर रहा है जिसे Pentagon द्वारा WU-14 नाम दिया गया है और चीन द्वारा DF-ZF नाम से रिपोर्ट किया गया है।

इस ग्लाइडर 2,000 किलोमीटर तक की सीमा में, कम से कम सात बार परीक्षण किया गया है।जो इसकी रेंज को यू.एस. एडवांस्ड हाइपरसोनिक हथियार से काफी कम बनाता है। यह स्पष्ट नहीं है कि यह परमाणु वारहेड, गैर-परमाणु वारहेड से आर्म्ड होगा। हो सकता है कि भविष्य में समय के साथ चीन एक गैर-परमाणु आर्म्ड ग्लाइडर विकसित करे।

काफी हद तक रूस की तरह, चीन के पास पहले से ही अमेरिका और उसके सहयोगी टार्गेट्स पर परमाणु हथियारों से हमला करने की क्षमता है। इसलिए चीनी न्यूक्लियर वेपन्स से आर्म्ड बूस्ट-ग्लाइड हथियार केवल वर्तमान की स्थिति को मजबूत करने का काम करेंगे। और इसके opposite, यदि चीन गैर-परमाणु बूस्ट-ग्लाइड हथियार विकसित करता है, तो यह US को एक नई वास्तविक और सैन्य चुनौती पेश करेगा।

क्या UNITED STATES इस सिस्टम के खिलाफ कोई कदम उठा सकता है ?

कहा जाता है कि हाइपरसोनिक विपन्स से बचाव करना असंभव है क्योंकि वे बहुत तेजी से चलते हैं। पर यह अनुभवजन्य रूप से सच नहीं है। USA ने पहले से ही काफी प्रभावी “प्वाइंट डिफेंस” विकसित कर ली है – जैसे पैट्रियट और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) – जो कि बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ छोटे एरियाज की रक्षा कर सकता है, जो वास्तव में हाइपरसोनिक हथियारों की तुलना में तेजी से आगे बढ़ रह हैं।

अतः, स्पीड अपने आप में मिसाइल से सुरक्षा के लिए एक बाधा नहीं है। उन प्वाइंट डिफेंस प्रणालियों, और विशेष रूप से THAAD को हाइपरसोनिक मिसाइलों से निपटने के लिए भविष्य में बहुत ही अनुकूल रूप से विकसित किया जा सकता है। उन प्रणालियों का नुकसान यह है कि वे केवल छोटे क्षेत्रों की रक्षा कर सकते हैं। पूरे USA की रक्षा के लिये इनकी बड़ी मात्रा में आवश्यकता होगी।

साथ ही, USA ने एक मिसाइल रक्षा प्रणाली, ग्राउंड बेस्ड मिडकोर्स सिस्टम तैनात किया है, जिसे बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ पूरे यूनाइटेड स्टेट्स की रक्षा करने की कोशिश करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। पर कई तकनीकी कारणों से, हाइपरसोनिक हथियारों से निपटने के लिए इन “प्वाइंट डिफेंस” का उपयोग करना कुछ हद तक संभव नहीं है।

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