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ऋषिकेश से हेमकुंड साहिब कैसे पहुचें?

ऋषिकेश से हेमकुंड साहिब यात्रा – नमस्कार दोस्तों कैसे हैं मेरा नाम नरेंद्र है और में आज आपको बताने वाला हूं कि आप ऋषिकेश से हेमकुंड की यात्रा किस प्रकार करेंगे और किस प्रकार यहां पर पहुंचा जा सकता है? यहां पर क्या-क्या रहने खाने की व्यवस्था और यात्रा के दौरान आपको किन किन चीजों की आवश्यकता है और किस प्रकार आप पैदल मार्ग पर जाएंगे?

तो इस लेख को ध्यान से पढ़िए में इन सभी चीजों का उल्लेख इस लेख में करूंगा। तो सबसे पहले अगर आप नीचे मैदानी इलाकों से आ रहे हैं तो सबसे पहले आप ऋषिकेश पहुंच जाएंगे। आप चाहे किसी भी प्रकार ऋषिकेश पहुंच जाइए, ऋषिकेश के नजदीक जौली ग्रांट एयरपोर्ट है आप चाहे तो ऋषिकेश हवाई यात्रा से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं।

इसके अलावा आप ट्रेन से भी ऋषिकेश तक पहुंच सकते हैं और गाड़ियां बस से भी आप ऋषिकेश पहुंच सकते हैं। अब ऋषिकेश से ऊपर आपको सिर्फ बस, कार या बाइक से ही जाना होता है क्योंकि यहां पर फिलहाल ट्रेन और एयरपोर्ट की सुविधा मौजूद नहीं है तो आपको बाई रोड ही ऋषिकेश से ऊपर के लिए निकलना होगा। सबसे पहले आपको ऋषिकेश से ब्यासी, तीनधारा, देवप्रयाग, मलेथा, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गोचर, करणप्रयाग, चमोली, नंदप्रयाग, पीपलकोटी, जोशीमठ, विष्णुप्रयाग होते हुए अंत में गोविंदघाट पहुंचना है।

ऋषिकेश से गोविंदघाट पहुचने में कितना समय लगेगा?

ऋषिकेश से गोविंदघाट की दूरी लगभग 266 किलोमीटर है। जिसमें आपको ऋषिकेश से गोविंदघाट पहुंचने में 8 से 10 घंटे लग जाते हैं क्योंकि, पहाड़ी इलाका होने की वजह से यहां पर आप गाड़ी की स्पीड 60 से 80 के बीच में ही रख पाएंगे। इससे ज्यादा रफ्तार में आप यहां पर गाड़ी नहीं चला सकते इसलिए आपको इतना समय आराम से लग जाएगा।

ऋषिकेश से हेमकुंड साहिब
ऋषिकेश से हेमकुंड साहिब

गोविंद घाट से पैदल यात्रा कैसे करें?

अब आप की पैदल यात्रा गोविंदघाट से शुरू होती है गोविंदघाट से। आपको चार-पांच किलोमीटर और आगे तक बाइक या गाड़ी से जाना होता है यहां पर एक गांव पड़ता है वहां पर आपको अपनी गाड़ियां बाइक पार्क करनी होती है फिर यहां से आपको 15 किलोमीटर की चढ़ाई चढ़कर हेमकुंड साहिब के दर्शन होंगे।

जैसा कि अभी मैंने बताया अब इस गांव से आपको पैदल यात्रा शुरू करनी होती है। यहां से हेमकुंड साहिब की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है आप चाहे यहां से घोड़े खच्चर में भी जा सकते हैं या पैदल जा सकते हैं। अब आपको सबसे पहले 9 किलोमीटर ऊपर चढ़ने के बाद आपको एक जगह पड़ती है जिसका नाम है घांघरिया। आपको पहले दिन घांघरिया में रुकना पड़ता है क्योंकि, उससे ऊपर अगर आप जाएंगे तो वहां पर रहने की व्यवस्था नहीं है इसलिए आपको घांघरिया में ही रुकना पड़ता है यहां पर रुकने की संपूर्ण व्यवस्था है यहां पर बहुत सारे होटल है और खाने-पीने की उचित व्यवस्था है।

अगर आप सुबह जल्दी पैदल यात्रा शुरू करते हैं तो आप एक ही बार में ऊपर 15 किलोमीटर चढ़कर हेमकुंड साहिब के दर्शन करके वापस 6 किलोमीटर नीचे घांघरिया में रात्रि विश्राम के लिए आना होगा क्योंकि ऊपर मंदिर परिसर में रहने की व्यवस्था नहीं है और ना ही बीच में कहीं रहने की व्यवस्था है बीच में आपको सिर्फ छोटे-मोटे ढाबे ही मिलेंगे जिनमें आपको सिर्फ खाने पीने की व्यवस्था ही मिलेगी।

घांघरिया से फूलों की घाटी कैसे जाएं?

अगर आप अगर आप हेमकुंड साहिब के साथ साथ फूलों की घाटी भी जाना चाहते हैं तो आपको घांघरिया से फूलों की घाटी के लिए निकलना होगा। घांघरिया से फूलों की घाटी की दूरी 4 किलोमीटर है। आपको गागरिया से फूलों की घाटी जाते समय सबसे पहले एक वन विभाग की चौकी मिलेगी जहां पर आपसे थोड़ा बहुत पूछताछ की जाएगी और आपका ऊपर जाने के लिए पास बनाया जाएगा और आपके पास जो भी मौजूदा सामान है उसकी एंट्री यहां पर की जाएगी।

फूलों की घाटी के लिए आपको पैदल ही जाना होगा क्योंकि यहां पर जाने के लिए घोड़ों की व्यवस्था नहीं है या यूं कह सकते हैं कि यहां पर घोड़ों से नहीं जाया जाता है इसलिए आपको घांघरियासे फूलों की घाटी 4 किलोमीटर चढ़ाई चढ़कर ही ऊपर जाना पड़ेगा।

हेमकुंड साहिब की चढ़ाई कितनी है?

उत्तराखंड के चमोली में स्थित हेमकुंड साहिब की चढ़ाई 15 किलोमीटर है जिसे आप पैदल या तो घोड़े खच्चर की मदद से पूरी कर सकते हैं। यहां पर घोड़े का रेट 15 किलोमीटर ऊपर और नीचे करने का लगभग 4300 है। अगर आप 9 किलोमीटर ऊपर चढ़कर गागरिया से घोड़ा खच्चर करते हैं तो वहां से आने जाने का 2500 रुपए किराया है और खाली जाने-जाने का उन्नीस सौ रुपए किराया है।

हेमकुंड किसको कहा गया है तथा क्यों?

करीब 15 हज़ार ऊंचे ग्लेशियर पर स्थित श्री हेमकुंड साहिब चारों तरफ से ग्लेशियर (हिमनदों) से घिरे हैं। इन्हीं हिमनदों का बर्फीला पानी जिस जलकुंड का निर्माण करता है, उसे ही हेम+कुंड यानी की हेमकुंड कहते हैं।

गुरुद्वारा में किसकी पूजा होती है?

सिख एक ही ईश्वर को मानते हैं, जिसे वे एक-ओंकार कहते हैं। उनका मानना है कि ईश्वर अकाल और निरंकार है।

हेमकुंड साहिब की खोज कब हुई?

हेमकुंड साहिब सिख लोगों का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है जहां पर सिख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु गुरु गोविंद सिंह ने साधना की थी और साथ ही यहां पर लक्ष्मण मंदिर भी है जहां पर लक्ष्मण भगवान ने साधना की थी हेमकुंड साहिब की खोज सन 1934 में की गई थी।

सिखों का सबसे बड़ा गुरुद्वारा कौन सा है?

सिखों का सबसे बड़ा गुरुद्वारा भारत के पंजाब राज्य के अमृतसर शहर में स्वर्ण मंदिर जिसे आमतौर पर लोग गोल्डन टेंपल के नाम से या हरमिंदर साहिब गुरुद्वारे के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत का सबसे बड़ा गुरुद्वारा है। यहां पर लाखों की संख्या में लोग आते हैं और ऐसा माना जाता है कि दुनिया का सबसे बड़ा रसोईघर भी यहीं पर है क्योंकि, यहां पर हर दिन हजारों, लाखों लोगों का लंगर तैयार किया जाता है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां पर कितना बड़ा रसोईघर होगा और कितने बड़े-बड़े वहां पर खाना बनाने के बर्तन होंगे।

गुरुद्वारा को कब सजाया जाता है?

सिक्खों के गुरु यानी गुरु नानक देव जयंती के दिन गुरुद्वारे को सजाया जाता है। यह प्रत्येक साल 21 मई को मनाया जाता है। 21 मई को गुरु नानक जयंती के अवसर पर गुरुद्वारे को सजाया जाता है।

दिल्ली में ऐतिहासिक गुरुद्वारे कितने हैं?

दिल्ली में 8 ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं जो निम्न प्रकार हैं –

  • गुरुद्वारा बंगला साहिब
  • गुरुद्वारा शीशगंज साहिब
  • गुरुद्वारा बाबा बंदा सिंह बहादुर
  • गुरुद्वारा माता सुंदरी
  • गुरुद्वारा बाला साहिब
  • गुरुद्वारा मोती बाग साहिब
  • गुरुद्वारा दमदमा साहिब
  • गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब

दिल्ली का सबसे बड़ा गुरुद्वारा कौन सा है?

दिल्ली का सबसे बड़ा गुरुद्वारा बंगला साहिब के नाम से प्रसिद्ध है जो कि दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थित है यहां पर हर दिन हजारों लाखों की संख्या में लोग आते हैं और यहां पर प्रतिदिन हजारों लोगों का लंगर भी लगाया जाता है इस गुरुद्वारे के सामने एक सुंदर पानी की जेल भी है जो काफी बड़ी है यह दिल्ली का एक बहुत ही प्रमुख सिखों का गुरुद्वारा है।

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