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प्रदूषण किसे कहते हैं। प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं?

प्रदूषण होता क्या है?

पर्यावरण के मुख्य तत्व जैसे हवा,पानी, मृदा, आदि में अवांछनीय तत्वो का शामिल हो जाना प्रदूषण कहलाता है”। उदाहरण के लिए वायु में गैसों की मात्रा तय होती है कि, कौन सी गैस कितनी मात्रा में पाई जानी चाहिए जैसे कि 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन और बाकी 1% कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसे। यदि इस मात्रा में कुछ भी बदलाव हो तो इसे प्रदूषण कहा जायेगा।

Pradushan
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प्रदूषण कितने प्रकार के होते है?

प्रदूषण मुख्यतः तीन प्रकार के होते है

1) वायु प्रदूषण-

पृथ्वी के वायुमंडल मैं उपस्थित वाइट की संरचना में यदि कोई बदलाव होता है, या उसमें अवांछनीय तत्वों की मात्रा पाई जाती है तो स्थिति वायु प्रदूषण कहलाती है।

वायु प्रदूषण के कारण –

हमारे आसपास हो रही विभिन्न क्रियाओं के कारण धुआं या किसी प्रकार की गैस यदि वायु में मिल जाती है, तो वे सभी वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार होती हैं।
जैसे – ज्वालामुखी विस्फोट, जंगल में लगी आग, कार्बनिक पदार्थों का अपघटन, आदि जैसी क्रियाएं प्राकृतिक क्रियाएं हैं, पर ये भी प्रदूषण की लिए जिम्मेदार होती हैं। ज्वालामुखी फटने से जलवाष्प के साथ साथ कुछ गैसे जैसे सल्फर डाइऑक्साइड भी निकलती हैं, जंगलों में आग लगने पर बहुत ज्यादा मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड व कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है और कार्बनिक पदार्थ के अपघटन होने पर मीथेन गैस उत्सर्जित होती है, जो कि पर्यावरण के लिए हानिकारक होती है।

इसके अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं जिसमे की कार्बन और सीसा पाया जाता है, कारखानों से निकलने वाला धुआं, गैस रिसाव, आदि सभी भी वायु प्रदूषण के लिए प्रदूषक का कार्य करते हैं।
वायुमंडल को सबसे अधिक प्रदूषित करने वाली गैस कार्बन मोनोऑक्साइड है, जिससे कि ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या पैदा होती हैं।

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वायु प्रदूषण के प्रभाव-

  • अम्ल वर्षा : जब वायुमंडल में विभिन्न गैसे उत्सर्जित होती हैं जिसमें कि SO2 और NO2 प्रमुख हैं, वे जलवाष्प के साथ अभिक्रिया करके बादलों के साथ मिल जाते हैं, और वर्षा के समय HNO3 एवं H2SO4 जैसे अम्लों के रूप में पृथ्वी पर बरसते हैं, इसे ही “अम्ल वर्षा” कहते हैं।
  • वायु प्रदूषण से स्वास संबंधी रोग या समस्या हो सकती है। इसके साथ ही कार्बन मोनो ऑक्साइड के शरीर में जाने से रक्त परिसंचरण को प्रभावित करती है और सीसा मस्तिष्क एवं तंत्रिका तंत्र संबंधी रोग को बड़ावा देते हैं।
  • कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन आदि ग्रीनहाउस गैसे है जिनकी मात्रा बड़ने पर ये गैस वायुमंडल m तापमान को बढ़ाते हैं जिसे की ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है।

वायु प्रदूषण के उपाय –

  • वैकल्पिक ईंधन का प्रयोग जोकि कम मात्रा में हानिकारक गैस उत्सर्जित करें जैसे कि CNG।
  • नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों का उपयोग जैसे कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि।
  • अधिक से अधिक वृक्ष लगाना। जैसे कि वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं। इस प्रकार यह वायु प्रदूषण को कम करने में सहायक है। विशेषतः अशोक के वृक्ष जो की वायुमंडल में उपस्थित धूल के कणों को अवशोषित कर लेते हैं।
  • लाईकेन (कवक और शैवाल का सहजीवी संबंध) पर्यावरण का जैविक सूचक होता है, जो की पर्यावरण में प्रदूषण का पता करने में सहायक होते हैं। इसी प्रकार वायु गुणवत्ता सूचकांकों का प्रयोग करना चाहिए।

2) जल प्रदूषण –

जल हमें दो प्रकार से उपलब्ध होता है एक तो जमीन के ऊपर पाया जाने वाला और दूसरा जमीन के नीचे पाया जाने वाला। यानी भूमिगत जल, और यह भी आज प्रदूषित हो चुका है, और पानी पीने योग्य नहीं रह गया है।

जल प्रदूषण के कारण-

जल में ऑक्सीजन की मात्रा से पता लगाया जाता है कि वह शुद्ध है या नहीं। भूमिगत जल में मुख्यतः आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा होने पर वह प्रदूषित हो जाता है।
वहीं भूमि पर औद्योगिक कचरा, कृषि में उपयोग होने वाली कृत्रिम खाद, आदि जल में मिलने पर “जल प्रदूषण” को जन्म देते हैं। इसके अलावा पानी में प्लास्टिक आदि फेंके जाने से भी वह प्रदूषित हो जाता है।

जल प्रदूषण के प्रभाव –

  • इंसानों में हैजा, पीलिया, आदि रोग होने की संभावना होती है।
  • जीवो पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है, जैसे कि उनके प्रजनन दर का घटना ।

जल प्रदूषण के उपाय –

  • पानी में समय समय पर आर्सेनिक व ऑक्सीजन की मात्रा को चेक करना।
  • BOD लेवल में सुधार करना।
  • औद्योगिक कचरे को नदी तालाब में जाने से रोकना।

3) मृदा प्रदूषण –

मृदा प्रदूषण क्या है – “किसी क्षेत्र में यदि मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है या उसमें कुछ वांछनीय तत्व मिल जाते हैं तो यह “मृदा प्रदूषण” को जन्म देता है”।

मृदा प्रदूषण के कारण –

  • कृषि के दौरान लंबे समय तक मृदा में कीटनाशक, कृत्रिम उर्वरक या रासायनिक खाद मिलने से मृदा प्रदूषित हो जाती है और साथ ही अपनी उर्वरा शक्ति भी को देती है।
  • प्राकृतिक या मानवीय कारणों से मृदा अपरदन होने से भी प्रदूषण के लिए जिम्मेदार होता है।
  • मिट्टी में प्लास्टिक कचरे के मिल जाने से मृदा दूषित हो जा है, क्योंकि प्लास्टिक कभी अपघटित नहीं होता है।

मृदा प्रदूषण के उपाय –

  • वृक्षारोपण करना, क्योंकि वृक्ष मृदा अपरदन को रोकते हैं।
  • Plastic कचरे को खुले में न फेंकना।

अन्य प्रदूषण –

  1. जैव प्रदूषण – सूक्ष्मजीव जैसे वायरस या बैक्टीरिया से या के द्वारा उत्पन्न प्रदूषण। इसका प्रयोग अस्त्र के रूप में भी किया जाता है। जैसे की कोई जैविक बॉम्ब बना कर एक वर्ग को हानि पहुंचाना।
  2. ध्वनि प्रदुषण – किसी क्षेत्र में ध्वनि की मात्रा का बहुत अधिक हो जाना ध्वनि प्रदुषण कहलाता है। 60-70 डेसिबल के बाद ध्वनि प्रदुषण का रूप ले लेती है, जो की मानव जीवन के लिए हानिकारक हो सकता है।

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