पंच बद्री के नाम
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पंचबद्री के नाम ǀ panch badri name

पंचबद्री –

बद्रीनाथ मन्दिर के अलावा भगवान विष्णु के चार अन्य मन्दिर हैं। बद्रीनाथ, भविष्यबद्री, योगध्यानबद्री, वृद्धबद्री और आदिबद्री । इन्हें मिलाकर भगवान विष्णु के पाँचों मन्दिर पंचबद्री कहलाते हैं । इन मन्दिरों में विष्णु जी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती हैं।

पंच बद्री के नाम
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पंचबद्री के नाम

1. योगध्यान बद्री :

हरिद्वार से बद्रीनाथ धाम के मार्ग पर बद्रीनाथ धाम आने से 23 कि.मी. पहले पाण्डुकेश्वर में 1920 मीटर की ऊँचाई पर यह मन्दिर स्थित है मन्दिर के गर्भगृह में ध्यानावस्था में भगवान विष्णु जी की मूर्ति है। ऐसी मान्यता है कि राजा पाण्डु ने यहाँ कुन्ती से विवाह किया था और यह स्थान पांचलदेश कहलाने लगा था । पाण्डुकेश्वर पाण्डव राजा के नाम पर आधारित है। ऐसा कहा जाता है कि कौरवों से युद्ध के बाद विजय प्राप्त कर पाण्डव भय से वंशीभूत होकर हिमालय आये यहाँ आकर उन्होंने राजा परीक्षित को अपनी राजधानी हस्तिनापुर सौंप दी तथा स्वर्गारोहण से पहले यहाँ उन्होंने घोर तपस्या की थी। यहाँ की यात्रा करने वाले यात्रियों को गोविन्द घाट जो कि 3 कि.मी. की दूरी पर स्थित है वहाँ होटल अथवा गुरूद्वारा में रात्रि विश्राम हेतु रूकना पड़ता था । अब पाण्डुकेश्वर में भी यात्रियों के ठहरने एवं खाने की व्यवस्थायें हो गई हैं।

2. वृद्धबद्री :

यह मन्दिर हरिद्वार जोशीमठ मार्ग पर जोशीमठ से 8 कि.मी. पहले अनीमठ में स्थित है। मुख्य सड़क से आधा किलोमीटर पैदल यात्रा पर यहाँ पहुँचा जा सकता हैं। यहाँ भगवान लक्ष्मीनारायण जी की अत्यंत प्राचीन मूर्ति सुशोभित हैं। एक बार बद्रीकाश्रम जाते समय नारद

जी इसी स्थान पर भगवान नारायण की आराधना करने लगे तब भगवान ने उन्हें एक वृद्ध के रूप में दर्शन दिये थें, इसी कारण से वृद्धबद्री के नाम से जाना जाता हैं। इस मन्दिर के पास ही एक अन्य मन्दिर में शिवलिंग स्थापित हैं यह मन्दिर एक विशाल वट वृक्ष से ढका हुआ है। यह मन्दिर श्रद्धालुओं के लिये हमेशा खुला रहता है। ऐसी मान्यता है कि आदि गुरू शंकराचार्य ने बद्रीनाथ मन्दिर में प्रवेश करने से पहले भगवान विष्णु की यहाँ पूजा अर्चना की थी। यह मन्दिर अनीमठ में 1380 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है । यहाँ ठहरने व खाने की उचित व्यवस्था है ।

3. भविष्यबद्री :

भविष्यबद्री जाने के लिये जोशीमठ से तपोवन होते हुये 19 कि.मी. की दूरी पर स्थित सलधार तक मोटर कार से जाना पड़ता है यहाँ से भबिष्यबद्री जाने के लिये ६ कि.मी. की पैदल यात्रा करना पड़ती है भविष्यबद्री तपोवन से घिरे हुये घने वनों के बीच 2744 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है । इस मन्दिर में एक शिला हैं जिस पर अभी आधी मूर्ति प्रगट हुई दिखाई दे रही हैं। ऐसी मान्यता है कि जब भविष्य में यह मूर्ति अपना पूर्ण आकार ग्रहण कर लेगी तो विष्णु प्रयाग के पास नर-नारायण पर्वत आपस में मिल जावेंगे, जिससे बद्रीधाम का मार्ग बन्द हो जावेंगा तब बद्रीनाथ भगवान की पूजा यहीं पर होगीं ।

आदि ग्रन्थों के अनुसार भविष्यबद्री ही वह स्थान है जहाँ पर बद्रीनाथ का मार्ग बन्द हो जाने के बाद धर्मावलम्बी पूजा अर्चना के लिये आया करेगें यह केवल एक धारणा है यद्यपि ऐसा कोई कारण वर्तमान में सामने नहीं है कि बद्रीनाथ धाम का मार्ग अवरुद्ध हो जायेगा । हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार जोशीमठ जो कि एक कठिन चढ़ाई के बाद का प्रमुख ठहरने का पड़ाव है। यह स्थान भू-स्खलन क्षेत्र में स्थित है जो कि नीचे की ओर धसता जा रहा है अतः हो सकता है भविष्य में कभी बद्रीनाथ जाने का मार्ग अवरूद्ध हो जाये इससे दैवी भविष्य वाणी सही साबित हो अतः इसी कारण से इसे भविष्यबद्री नाम दिया गया हो।

तपोवन के शांतिपूर्ण प्राकृतिक वातावरण में भविष्यबद्री की पैदल यात्रा होती है। भविष्यबद्री धौली गंगा के किनारे स्थित है। धौलीगंगा के तटों के किनारे गर्मपानी के अनेक स्त्रोत मिलते है। यहाँ विष्णु भगवान के नरसिंह अवतार रूप की शेर के धड़ की आकृति विद्यमान है। भविष्यबद्री की यात्रा करने वालों को जोशीमठ अथवा तपोवन में ठहरना पड़ता है।

4. आदिबद्री :

कर्ण प्रयाग से 19 कि.मी. की दूरी पर यह मन्दिर स्थित है। यह स्थान रानीखेत, नैनीताल एवं रामनगर से भी मोटर मार्ग से जुड़ा हुआ है । आदि बद्री में सोलह मन्दिरों का समूह है जो कि अब खण्डहरों की स्थिति में पहुँच गये है आदि बद्री का मन्दिर भगवान नारायण को समर्पित है यह मन्दिर एक ऊँचे चबूतरे पर पिरामिड की आकृति में स्थित है। ऐसी धारणा है कि इनका निर्माण आदि शंकराचार्य ने कराया था । इस मन्दिर के अन्दर काले रंग के पत्थर से बनी हुई लगभग एक मीटर ऊँचाई की भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित है । यह सभी मन्दिर गुप्तकाल समय के है।

5. बद्रीनाथ :

उत्तराखण्ड के चमोली जिले की हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा चारों धामों में सर्वश्रेष्ठ हिन्दू धर्म का सर्वाधिक पावन तीर्थस्थल बद्रीनाथ स्थित है जो भारत के समस्त हिन्दू श्रृद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है धर्मशास्त्रों में इसकी पवित्रता के बारे में लिखा है कि “स्वर्ग” धरती और पाताल में कई तीर्थस्थल है किन्तु बद्रीधाम जैसा न कोई है, और न कोई होगा”।

बद्रीधाम में गंगा जी अलकनंदा के रूप में बहती है। अलकनंदा आदि गंगा है जो मनुष्य इसमें स्नान करता है उसे पुण्य की प्राप्ति होती है विष्णु पदी गंगा “अलकनंदा“ के दर्शन से मनुष्य के संपूर्ण कष्टों का नाश हो जाता है। आज इस कलयुग में वह मनुष्य अत्यन्त भाग्यशाली है जो बद्रीधाम पहुंचकर भगवान विष्णु जी के मंदिर के दर्शन करता है। ऐसा माना जाता है यहां हर प्राणी विष्णु तुल्य हो जाता है। इस क्षेत्र में भयंकर पापों का नाश करने वाली अलकनंदा मौजूद है। यहां देवी-देवता, गंधर्व यक्ष, राक्षस, किन्नर सभी विष्णु जी की भक्ति में लगे रहते है।

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