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कार्तिक स्वामी मंदिर रूद्रप्रयाग।

कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में रुद्रप्रयाग-बेलनी-पोखरी मार्ग पर कनकचौरी गांव के पास 3050 मीटर की ऊंचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है।। कार्तिक स्वामी मंदिर भगवान शिव के बड़े पुत्र, कार्तिकेय को समर्पित है, जिन्होंने अपने पिता के प्रति समर्पण के प्रमाण के रूप में अपनी हड्डियों की पेशकश की थी। माना जा रहा है कि घटना यहीं हुई है। भगवान कार्तिक स्वामी को भारत के दक्षिणी भाग में कार्तिक मुरुगन स्वामी के रूप में भी जाना जाता है।

कार्तिक स्वामी मंदिर रूद्रप्रयाग
कार्तिक स्वामी मंदिर रूद्रप्रयाग

कार्तिक स्वामी मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने अपने पुत्रों भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय को चुनौती दी कि जो कोई भी पहले ब्रह्मांड के सात चक्कर लगाएगा, उसे पहले पूजा करने का सम्मान मिलेगा। यह सुनकर, भगवान कार्तिकेय अपने वाहन पर ब्रह्मांड का चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े, जबकि, भगवान गणेश ने अपने माता-पिता, भगवान शिव और देवी पार्वती के सात चक्कर लगाए। गणेश से प्रभावित होकर, भगवान शिव ने उन्हें सबसे पहले पूजा होने का सौभाग्य दिया। परिणामस्वरूप, भगवान कार्तिकेय ने निर्णय पर अपना क्रोध दिखाया और श्रद्धा के रूप में अपने शरीर और हड्डियों को अपने पिता को बलिदान कर दिया।

कार्तिक स्वामी कौन थे?

कार्तिक स्वामी मंदिर भगवान शिव के बड़े पुत्र, कार्तिकेय को समर्पित है, जिन्होंने अपने पिता के प्रति समर्पण के प्रमाण के रूप में अपनी हड्डियों की पेशकश की थी। माना जा रहा है कि घटना यहीं हुई है। भगवान कार्तिक स्वामी को भारत के दक्षिणी भाग में कार्तिक मुरुगन स्वामी के रूप में भी जाना जाता है।

कार्तिक स्वामी की उत्पत्ति कैसे हुई?

कार्तिकेय जी भगवान शिव और भगवती पार्वती के पुत्र हैं । ऋषि जरत्कारू और राजा नहुष के बहनोई हैं और जरत्कारू और इनकी छोटी बहन मनसा देवी के पुत्र महर्षि आस्तिक के मामा । भगवान कार्तिकेय छ: बालकों के रूप में जन्मे थे तथा इनकी देखभाल कृतिका (सप्त ऋषि की पत्निया) ने की थी, इसीलिए उन्हें कार्तिकेय धातृ भी कहते हैं।

सड़क मार्ग से कार्तिक स्वामी मंदिर कैसे पहुंचे?

अगर आप मैदानी इलाकों से आ रहे हैं तो सबसे पहले आपको ऋषिकेश पहुंचना है उसके बाद आपको देवप्रयाग, श्रीनगर होते हुए रुद्रप्रयाग पहुंचना है। रुद्रप्रयाग से आपको पोखरी वाली रोड पर जाना है। जिस जगह पर आपको रुकना है वहां का नाम कनकचौरी गाँव है वहां से 4 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू होती है। ऋषिकेश से कनकचौरी गाँव की दूरी 178 किलोमीटर है जिसको तय करने में आपको करीब 6 घंटे का समय लग जाएगा।

ट्रेन मार्ग से कार्तिक स्वामी मंदिर कैसे पहुंचे?

कार्तिक स्वामी मंदिर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है जोकि मंदिर से 178 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद आप बस या गाड़ी की मदद से रुद्रप्रयाग पहुंच सकते हैं।

हवाई मार्ग से कार्तिक स्वामी मंदिर कैसे पहुंचे?

कार्तिक स्वामी मंदिर का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जौलीग्रांट हवाई अड्डा देहरादून में स्थित है जोकि मंदिर से 191 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है अगर आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं तो आपको देहरादून में स्थित जौली ग्रांट एयरपोर्ट आना होगा।

दिल्ली से कार्तिक स्वामी मंदिर कैसे पहुंचे?

सबसे पहले आपको ऋषिकेश पहुंचना है उसके बाद आपको देवप्रयाग, श्रीनगर होते हुए रुद्रप्रयाग पहुंचना है। रुद्रप्रयाग से आपको बेलनी-पोखरी रोड पर जाना है। जिस जगह पर आपको रुकना है वहां का नाम कनकचौरी गाँव है वहां से 4 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू होती है। ऋषिकेश से कनकचौरी गाँव की दूरी 178 किलोमीटर है जिसको तय करने में आपको करीब 6 घंटे का समय लग जाएगा।

कार्तिक स्वामी मंदिर में जाने का सबसे अच्छा समय?

वैसे तो यहां आप किसी भी सीजन में जा सकते हैं लेकिन खास करके अगर आप दिसंबर के अंत में या जनवरी-फरवरी में आते हैं तो यहां पर आपको बर्फ देखने को मिल जाएगी और चारों तरफ बर्फीले पर्वतों की ऊंची बर्फीली चोटियां देखने को भी मिलेंगी।

कार्तिक स्वामी मंदिर से दिल्ली मार्ग के बीच के स्थान?

  • रूद्रप्रयाग
  • कोटेश्वर महादेव मन्दिर
  • धारीदेवी
  • श्रीनगर गढ़वाल
  • कीर्तिनगर
  • देवप्रयाग
  • तीनधारा
  • कोडियाला
  • ब्यासी
  • शिवपुरी
  • ऋषिकेश
  • हरिद्वार
  • रुड़की
  • मेरठ
  • गाजियाबाद
  • मोदिनगर
  • दिल्ली

कार्तिक स्वामी मंदिर की यात्रा में कितना खर्च आएगा?

अगर आप अपनी बाइक से आ रहे हैं तो कुल मिलाकर 1000 से 1500 खर्चे में आपका काम चल जाएगा। अगर आप कार में फैमिली के साथ आ रहे हैं तो आपका कुल मिलाकर 4000 से 5000 खर्चा आ जाएगा। इसमें आपका ट्रेन टिकट, हवाई टिकट नहीं जुड़ा हुआ है वह आपका अपना अलग रहेगा कि आप किस माध्यम से आ रहे हैं।

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