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HDD या SSD के फायदे? HDD Or SSD में अंतर क्या अंतर है?

HDD (Hard Disk Drive) Vs SSD (Solid Disk Drive) –

एचडीडी और एसएसडी इनमें से किसे इस्तेमाल करना चाहिए और फायदे नुकसान आज हम सब कुछ बताने वाले हैं इस लेख। में आपको हार्ड डिस्क ड्राइव के बारे में तथा एसएसडी के बारे में विस्तृत जानकारी देने वाला हूँ।

HDD (Hard Disk Drive) क्या होता है?

आपको बता दें कि हार्ड डिस्क ड्राइव 50 साल पुरानी टेक्नोलॉजी है। 50 साल पहले भी हार्ड डिस्क ड्राइव का प्रयोग किया जाता था लेकिन, हार्ड डिस्क ड्राइव में मूविंग पार्ट होते हैं। मतलब अगर नीचे गिर गया तो खराब होने के चांसेस ज्यादा होते हैं लेकिन, यह मूविंग पार्ट्स होते क्या है? अंदर एक सर्कुलर डिस्क होता है जिसका नाम होता है PLATTER और इसी के ऊपर जो डाटा है वह स्टोर होता है और उधर ही रीड एंड राइट होता है।

अब आप पूछेंगे कैसे रीड एंड राइट होता है। क्या आपको ग्रामोफोन पता है जिससे पुराने जमाने में म्यूजिक प्ले करते थे। उस पर एक डिस्क होती थी जिसमें एक पॉइंट टच होता था फिर वह गोल-गोल घूमती थी और तब म्यूजिक आता था। जैसे की उदाहरण के लिए आप नीचे इमेज देख सकते हैं।

PLATTER क्या होता है?

वैसे ही कुछ होता है हार्ड डिस्क ड्राइव (Hard Disk Drive) के साथ भी। वह जो PLATTER होता है और एक नीडल (Needle) होती है जो रीड और राइट करती है। यह PLATTER जितना फास्ट घूमेगा उतना ही फास्ट आपका डाटा रीड ओर राइट होगा। इसीलिए हार्ड डिस्क ड्राइव के साथ हमेशा 5400rpm (Round Per minute) घूमता है या 7200rpm पर हमेशा HDD के साथ घूमता है। तो जितना ज्यादा PLATTER को घूमने का स्पीड मिलेगा उतना ज्यादा हार्ड डिस्क ड्राइव का रीडिंग स्पीड होगा और इसीलिए हार्ड डिस्क पर कुछ रीड और राइट होता है।

जब आप कुछ स्टोर करते हो तो, हार्डडिस्क में से आवाज आता है। SSD में ऐंसा नहीं होता है। हम बताएंगे आपको रीज़न क्यों? पर हार्ड डिस्क ड्राइव एक मूविंग पार्ट है जो घूमेगा तो आवाज तो आएगी ही। हार्ड डिस्क ड्राइव का जो साइज होता है वह बड़ा होता है अगर आप SSD के साथ कंपेयर करें तो।

लेकिन एक दो चीजें ऐसी भी हैं जो, हार्ड डिस्क ड्राइव के फेवर में जाती हैं। क्योंकि एक तो यह पुरानी टेक्नॉलॉजी है तथा भरोसेमंद टेक्नोलॉजी है उतना ही नहीं बल्कि सस्ती भी है। अगर आप SSD की तुलना में कम्पेर करें तो, मान लीजिए अगर आप ₹10000 खर्च करके एक SSD में आपको 1TB स्टोरेज मिलता है तो इसी प्रकार वहीं आपको हार्ड डिस्क ड्राइव (HDD) में 6TB तक स्टोरेज तक मिल जाएगा।

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SSD (Solid State Drive) क्या है?

अब बात करते हैं सॉलि़ड स्टेट ड्राइव यानी कि SSD की। इसमें कोई भी मूविंग पार्ट्स नहीं होता है। आपको पता है जैसे पुराने कंप्यूटर की मेमोरी हुआ करती थी, मेमोरी स्टिक हुआ करती थी वैसे ही कुछ है इस SSD में, और बेसिकली SSD के अंदर मेमोरी Chip होते हैं। जितने ज्यादा Chip उतना ज्यादा स्टोरेज, और इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें मूविंग पार्ट्स ना होने की वजह से इनकी लाइफ काफी ज्यादा होती है। जैसे कि आप सामने इमेज में देख रहे होंगे जो यह काले काले कलर के छोटे-छोटे चिप्स हैं यही SSD के Chip होते हैं।

एक्सीडेंट ली यह गिर भी गई तो कोई दिक्कत नहीं होने वाली है। क्योंकि मूविंग पार्ट्स ना होने की वजह से ज्यादा कुछ होता नहीं है। नो मूविंग पार्ट्स मतलब नॉइस (NOISE) आवाज वगैरह कुछ नहीं आती है। अगर स्पीड की बात करें तो यह काफी फास्टर होता है। किसी टाइम यह 5x फास्टर होता है HDD के कंपैरिजन में। लेकिन कुछ फायदे हैं। एकतो SSD छोटा होता है, फास्ट होता है, नो मूविंग पार्ट्स है, लॉन्ग लाइफ है पर HDD के कंपैरिजन में यह काफी कॉस्टली है। अगर 2TB HDD की प्राइस होगी ₹5000 तो, 2Tb SSD की कम से कम 8 से ₹10000 होगी। लगभग दो गुना प्राइस है HDD की तुलना में।

यह तो बात हो गई HDD और SSD की। अब बात आती है डाटा ट्रांसफर की। तो जब डाटा ट्रांसफर होता है तो एक ही इंटरफ़ेस होता है। HDD में पुराने जमाने में SATA-1, SATA-2 होता था, अब SATA-3 हो गया है लेकिन, अब अलग-अलग टेक्नोलॉजी डाटा ट्रांसफर के लिए आ गई है। SSD में M.2 है, तथा MNME है जो लेटेस्ट है तो जो इंटरफ़ेस होता है वह भी बहुत ही इंपॉर्टेंट होता है रीड एंड राइट के लिए। तो बेसिकली HDD ही क्यों खरीदनी चाहिए।

HDD या SSD दोनों के क्या फायदे हैं?

देखिए अब आप कहेंगे ससद इतना फास्ट और अच्छा है तो मैं वही लूंगा। ऐसा नहीं है। बहुत सारे एप्लीकेशन ऐसे होते हैं जहां पर आपको सिर्फ स्टोरेज चाहिए होता है, ज्यादा रीड एंड राइट आप उसके ऊपर नहीं करते हो। उदाहरण के लिए मान लीजिए बहुत सारे लोगों को सिर्फ वीडियोस को स्टोरेज या ऑडियो को स्टोरेज करना होता है तो इसमें हमें खाली स्टोरेज की जरूरत पड़ रही है, रीड एंड राइट की जरूरत नहीं पड़ रही है। मतलब जहां पर सिर्फ स्टोरेज ज्यादा इंपोर्टेंट है।

तो आपको क्यों ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत है। माना की आप बजट पर हो तो जहां आपको HDD Rs.5000 में मिल जाती है वही, आपको SSD के लिए लगभग 2 गुना यानि की 8 से 10000 देने पड़ेंगे। कहने का मतलब है जहां पर सिर्फ स्टोरेज चाहिए वहां पर आप HDD ले सकते हैं। जरूरी नहीं है कि SSD लेना चाहि। माना कि आपके पास कोई लैपटॉप है या कोई कंप्यूटर आप बिल्ड कर रहे हो तो, एक कॉन्बिनेशन के तहत आप एक HDD लीजिए और एक SSD लीजिए।
मतलब स्टोरेज ज्यादा रखने के लिए आप HDD लेंगे।

माना आपके जो एप्लीकेशन है वह Run करने हैं, जो आपकी विंडोज है वह आप को इंस्टॉल करना है, एक 256Gb या 500GB की SSD लीजिए, जिसकी वजह से विंडोज फास्ट होगा एप्लीकेशन वगैरा ओपन फास्ट रन होंगे या आपको उसके ऊपर कुछ स्टोरेज करना है तो वह फास्ट होगा। मतलब जो आपकी विंडोज है या एप्लीकेशन है उसके लिए आप SSD इस्तेमाल कीजिए और बाकी जो और स्टोरेज रखना है उसके लिए आप HDD का इस्तेमाल कीजिए।

इससे पहली बात तो आपके पैसे की भी बचत होगी और जो Application आप Install करेंगे वह भी फास्ट रन कर पाओगे। अगर आप गेमिंग वगैरा करते हो तो आपके लिए फिर SSD ही लेनी चाहिए। अगर आप वीडियो एडिटर हो, अगर आप ग्राफिक्स का काम करते हो तो, इसमें रीड एंड राइट स्पीड बहुत जरूरी होता है जिसके हिसाब से फिर आपको SSD का ही इस्तेमाल करना चाहिए

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