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हरियाली देवी मंदिर रुद्रप्रयाग।

हरियाली देवी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक एवं पवित्र शक्तिपीठ है , जो कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के कोदीमा गाँव में स्थित है। यह मंदिर समुन्द्रतल से 1371 मीटर की ऊँचाई पर एक विशाल चोटीं पर स्थित है। मंदिर में हरियाली देवी की एक श्वेत मूर्ति शामिल है जिस पर माता शेर को सवारी करती हैं और मंदिर में हरियाली देवी की एक राजकुमारी की मूर्ति है, जो शेर की ओर झुकती है। इस मंदिर में माता पीले रंग के शेर की पीठ पर बैठी हुई है और आभूषणों के साथ नियमित रूप से सुसज्जित है।

हरियाली देवी मंदिर रूद्रप्रयाग
हरियाली देवी मंदिर रूद्रप्रयाग

रूद्रप्रयाग से हरियाली देवी मंदिर की दूरी?

  • 46.6 किलोमीटर
  • रूट मेप – रूद्रप्रयाग > रतूडा > नग्रासु > जसोली > कोदीमा > कोदीमा से 03 किलोमीटर पैदल हरियाली देवी मंदिर

हरियाली देवी मंदिर में मेले का आयोजन –

हरियाली देवी मंदिर में हर वर्ष प्राचीन काल से कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर तीन दिनों का मेला और दिवाली के अवसर पर दो दिनों का मेला का आयोजन किया जाता है। इन दोनों अवसरों पर हज़ारो की संख्या में भक्तजन माँ हरियाली का आशीर्वाद लेने के लिए आते है और दिवाली के अवसर पर माँ हरियाली की डोली (हरियाली देवी की मूर्ति) को 7 किमी की दुरी पर “हरियाली कांठा” तक ले जाते है।

हरियाली देवी मंदिर जाने के नियम –

यहाँ की सबसे ख़ास बात यह भी है कि सभी भक्तजनो को एक हफ्ते पहले से ही मीत-मांस , मदिरा , अंडे , प्याज और लहसुन का सेवन करना वर्जित है। जो भी भक्तजन इस यात्रा में शामिल होता है , उन्हें इन सभी खाद्यसामग्री का सेवन ना करना अनिवार्य होता है और इस यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस यात्रा में सिर्फ पुरुष ही शामिल होते है। महिलाओं का यहाँ जाना वर्जित है। सुनने में थोड़ा अटपटा है पर यह भी वहाँ की एक पुरानी मान्यता है।

इस पूजा में माँ हरियाली साक्षात रूप में भक्तो के समक्ष दर्शन देती है और जो कि श्रधाल या भक्त कोई मन्नत लेकर जाता है , माँ हरियाली देवी उसे फल के रूप में आशीर्वाद देती है और भक्त की मनोकामना को पूर्ण करती है।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार हरियाली देवी मंदिर की कथा?

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार , जब देवी महामाया देवकी माता और वासुदेव की सातंवी संतान के रूप में पैदा हुयी थी , तब मात्र नरेश “कंश” ने महामाया को धरती पर पटक कर मारना चाहा , जिसके फलस्वरूप महामाया माता के शरीर के टुकड़े पूरी पृथ्वी पर बिखर गए।

महामाया का हाथ जसोली नामक गांव में गिर गया इसलिए इस जगह को 58 सिद्धपीठों में से एक माना जाता है । बाद में इसी जगह पर “हरियाली देवी मंदिर” बनाया गया था। यह मंदिर एक ऊंची चोटी पर स्थित है और घने जंगल से घिरा हुआ है । मंदिर परिसर में विराजित देवी की मूर्ति पीले रंग की पोशाक में तैयार की जाती है एवम् एक शेर के पीछे बैठे हुए और उसके हाथ में एक बच्चे को ले जाती है। हरियाली देवी मंदिर में क्षेत्रपाल और हीत देवी की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं।

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