Digital sewa and tour and travel guide

Just another WordPress site

  1. Home
  2. /
  3. Tour & travel
  4. /
  5. उत्तराखंड पर्यटन
  6. /
  7. गोलू देवता मन्दिर अल्मोड़ा उत्तराखंड

गोलू देवता मन्दिर अल्मोड़ा उत्तराखंड

गोलू देवता मन्दिर – गोलू देवता मन्दिर कुमाऊं क्षेत्र के पौराणिक और ऐतिहासिक भगवान हैं । डाना गोलू देवता गैराड मंदिर, बिंसर वन्यजीव अभ्यारण्य के मुख्य द्वार से लगभग 2 किमी दूर पर है, और लगभग अल्मोड़ा से 15 किमी दूर है। गोलू देवता की उत्पत्ति को गौर भैरव (शिव) के अवतार के रूप में माना जाता है, और पूरे क्षेत्र में पूजा की जाती है और भक्तों द्वारा चरम विश्वास के साथ न्याय के औषधि के रूप में माना जाता है।

गोलू देवता मन्दिर
गोलू देवता मन्दिर

गोलू देवता मन्दिर कैसे पहुँचें?

सड़क मार्ग से गोलू देवता मन्दिर कैसे पहुँचें –

गैराड सड़क नेटवर्क के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। उत्तराखंड में हवाई और रेल संपर्क सीमित है, सड़क नेटवर्क सबसे अच्छा और आसानी से उपलब्ध परिवहन विकल्प है। एक टैक्सी से आप गोलू देवता मन्दिर के लिए दिल्ली या किसी भी दूसरे शहर से गैराड तक पहुंच सकते हैं।

ट्रेन मार्ग से गोलू देवता मन्दिर कैसे पहुँचें –

निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम करीब 110 किलोमीटर दूर स्थित है।

हवाई मार्ग से गोलू देवता मन्दिर कैसे पहुँचें –

अल्मोड़ा के नजदीकी हवाई अड्डा पंतनगर में स्थित है, जो गैराड से लगभग 147 किलोमीटर और अल्मोड़ा से लगभग 127 किलोमीटर दूर है।

गोलू देवता मन्दिर की कथा ?

ऐसा कहा जाता है कि श्री कल्याण सिंह बिष्ट (कालबिष्ट) का जन्म एक बड़े गांव पाटिया के पास कत्युडा गांव में हुआ था, जहां राजा के दीवान रहते थे। बहुत कम उम्र में श्री कालबिष्ट ने कुमाऊं क्षेत्र के सभी शैतानों को पछाड़ दिया और हमेशा के लिए मार डाला| श्री कालबिष्ट जी ने हमेशा गरीबों और दमनकारी लोगों की मदद की। श्री कालबिष्ट जी को संदेह से अपने निकट रिश्तेदार ने अपनी कुल्हाड़ी से सिर काट दिया था, जो पटिया के दीवान द्वारा प्रभावित था,राजा ने उसका सिर काट दिया गया।

श्री कालबिष्ट जी का शरीर डाना गोलू गैराड में गिर गया और उसका सिर अल्मोड़ा से कुछ किलोमीटर दूर कपडखान में गिर पड़ा। डाना गोलू में, गोलू देवता का मूल और सबसे प्राचीन मंदिर है। गोलू देवता भगवान शिव के रूप में देखा जाता है, उनके भाई कलवा भैरव के रूप में हैं और गर्भ देवी शक्ति का रूप है। कुमाऊ के कई गांवों में गोलू देवता को प्रमुख देवता या इष्टकुल देवता के रूप में भी प्रार्थना की जाती है।

न्याय के भगवान –

डाना गोलू देवता को न्याय के भगवान के रूप में जाना जाता है और महान गर्व और उत्साह के साथ प्रार्थना करते हैं। डाना गोलू देवता को सफेद कपड़ों, सफेद पगड़ी और सफेद शाल के साथ पेश किया जाता है। कुमाऊं में गोलू देवता के कई मंदिर हैं, और सबसे लोकप्रिय गैराड (बिन्सर), चितई , चंपावत, घोडाखाल में हैं।

लोकप्रिय धारणा है कि गोलू देवता भक्त को त्वरित न्याय प्रदान कराते हैं । उनकी इच्छाओं की पूर्ति के बाद भक्त मंदिर में घंटी चढ़ाते हैं | मंदिर के परिसर में हर आकार के हजारों घंटियाँ लटकी देखी जा सकती हैं। कई भक्तों ने कई लिखित याचिकाएं दर्ज़ कराई गयी हैं, जो मंदिर द्वारा प्राप्त की जाती हैं।

न्याय के भगवान
न्याय के भगवान

ऋग्वेद में उत्तराखंड को देवभूमि कहा गया है। ऐसी भूमि जहां देवी-देवता निवास करते हैं। हिमालय की गोद में बसे इस सबसे पावन क्षेत्र को मनीषियों की पूर्ण कर्म भूमि कहा जाता है। उत्तराखंड में देवी-देवताओं के कई चमत्कारिक मंदिर हैं। इन मंदिरों की प्रसिद्धि भारत ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैली हुई है। इन्हीं में से एक मंदिर गोलू देवता का भी है। गोलू देवता को स्थानीय मान्यताओं में न्याय का देवता कहा जाता है।

गोलू देवता मन्दिर की मशहूरता के किस्से –

गोलू देवता अपने न्याय के लिए दूर-दूर तक मशहूर हैं। हालांकि, उत्तराखंड में गोलू देवता के कई मंदिर हैं, लेकिन इनमें से सबसे लोकप्रिय और आस्था का केंद्र अल्मोड़ा जिले में स्थिति चितई गोलू देवता का मंदिर है। इस मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ और लगातार गुंजती घंटों की आवाज से ही गोलू देवता की लोक प्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

गोलू देवता मन्दिर की दूरी से जुड़ी मान्यताएं –

  • गोलू देवता को स्थानीय संस्कृति में सबसे बड़े और त्वरित न्याय के देवता के तौर पर पूजा जाता है।
  • इन्हें राजवंशी देवता के तौर पर पुकारा जाता है। गोलू देवता को उत्तराखंड में कई नामों से पुकारा जाता है।
  • इनमें से एक नाम गौर भैरव भी है। गोलू देवता को भगवान शिव का ही एक अवतार माना जाता है।
  • मनोकामना पूरी होने पर मंदिर में चढ़ाई जाती है घंटी गोलू देवता को शिव और कृष्ण दोनों का अवतार माना जाता है।
  • उत्तराखंड ही नहीं बल्कि विदेशों से भी गोलू देवता के इस मंदिर में लोग न्याय मांगने के लिए आते हैं।

मंदिर की घंटियों को देखकर ही आपको इस बात का अंदाजा लग जाएगा कि यहां मांगी गई किसी भी भक्त की मनोकामना कभी अधूरी नहीं रहती। मन्नत के लिए लिखना होता है आवेदन पत्र मंदिर में लाखों अद्भुत घंटे-घंटियों का संग्रह है। इन घंटियों को भक्त मनोकामना पूरी होने पर ही चढ़ाते हैं। चितई गोलू मंदिर में भक्त मन्नत मांगने के लिए चिट्ठी लिखते हैं। इतना ही नहीं कई लोग तो स्टांप पेपर पर लिखकर अपने लिए न्याय मांगते हैं।

अल्मोड़ा से गोलू देवता मन्दिर की दूरी?

चितई गोलू मंदिर अल्मोड़ा से आठ किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ हाईवे पर है। यहां गोलू देवता का भव्य मंदिर है। मंदिर के अंदर सेफेद घोड़े में सिर पर सफेट पगड़ी बांधे गोलू देवता की प्रतिमा है, जिनके हाथों में धनुष बाण है। इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु न्याय मांगने के लिए आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जिनको न्याय नहीं मिलता वो गोलू देवता की शरण में पहुंचते हैं और उसके बाद उनको न्याय मिल जाता है।

दिल्ली से गोलू देवता मन्दिर की दूरी?

गोलू मंदिर दिल्ली से 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप इस मंदिर के दर्शन के लिए जाना चाहते हैं तो आपको आनंद विहार से सीधे अल्मोड़ा की बस मिलेगी। इसके अलावा आप पहले दिल्ली से हल्द्वानी भी जा सकते हैं और इसके बाद यहा से अल्मोड़ा के लिए गाड़ी ले सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.