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डिजिटल भुगतान (Digital Payment) क्या होता है?

डिजिटल भुगतान सेवाएं वे संस्थाएं हैं जो डिजिटल या ऑनलाइन मोड के माध्यम से लेनदेन प्रदान करती हैं, जिसमें पैसे का कोई भौतिक आदान-प्रदान नहीं होता है। इसका मतलब यह है कि दोनों पक्ष, भुगतानकर्ता और प्राप्तकर्ता, पैसे का आदान-प्रदान करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग करते हैं।

Digital Payments in India – जैसा कि, आप सब जानते हैं, आज के इस आधुनिक युग में डिजिटल पेमेंट बहुत बड़ा रूप ले चुका है। आजकल आप हर जगह देख रहे होंगे कि, कैसे फोन के जरिए ही हम कहीं भी बैठे-बैठे पैसे भेज सकते हैं या किसी को भी फोन के जरिए क्यूआर कोड स्कैन करके पैसे पे कर सकते हैं। आज के इस आधुनिक युग में डिजिटल पेमेंट एक बहुत बढ़िया सुविधा के रूप में उभरा है, जिसमें आम इंसान को समय की बहुत ही बचत हो जाती है।

जहां बैंक में उसे घंटों इंतजार करना पड़ता था या एटीएम लाइन में खड़ा होना पड़ता था, वही अब आप अपने स्मार्टफोन के जरिए ही किसी को भी डिजिटल पेमेंट से पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं, या पे कर सकते हैं। तो चलिए बात करते हैं कुछ ऐसे ही चुनिंदा डिजिटल पेमेंट्स प्लेटफॉर्म के बारे में या कुछ इंटरनेट से जुड़ी नई तकनीकी वह जानकारी के बारे में। एक डिजिटल भुगतान, जिसे कभी-कभी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान कहा जाता है, एक डिजिटल डिवाइस जैसे मोबाइल फोन, पीओएस (बिक्री का बिंदु) या कंप्यूटर, एक डिजिटल चैनल संचार जैसे मोबाइल वायरलेस डेटा या का उपयोग करके एक भुगतान खाते से दूसरे में मूल्य का हस्तांतरण है। स्विफ्ट (सोसाइटी फॉर द वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन)। इस परिभाषा में बैंक हस्तांतरण, मोबाइल मनी और क्रेडिट, डेबिट और प्रीपेड कार्ड सहित भुगतान कार्ड से किए गए भुगतान शामिल हैं।

डिजिटल पेमेंट सॉल्यूशन “ई-रूपी” लॉन्च –

2 अगस्त 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डिजिटल पेमेंट सॉल्यूशन ई-रुपी लांच किया। यह डिजिटल भुगतान के लिए एक कैशलेस और संपर्क रहित माध्यम है। यह एक क्यूआर कोड या एसएमएस स्टिंग आधारित ई-वाउचर है, जिसे लाभार्थियों के मोबाइल पर पहुंचाया जाता है। इस निर्वात एकमुश्त भुगतान व्यवस्था के उपयोग करता अपने सेवा प्रदाता के केंद्र पर कार्ड, डिजिटल भुगतान ऐप या इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस के बगैर ही वाउचर की राशि को प्राप्त करने में सक्षम होंगे।

इसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने अपने यूपीआई प्लेटफार्म पर वित्तीय सेवा विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से विकसित किया है जो, बिना किसी फिजिकल इंटरफेस की डिजिटल तरीकों से लाभार्थियों को और सेवा प्रदाताओं के साथ सेवाओं के प्रयोजनों को जोड़ता है।

इसके तहत यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि, लेनदेन पूरा होने के बाद ही सेवा प्रदाता को भुगतान किया जाए इसका उपयोग मात्र और बाल कल्याण योजनाओं के तहत दवाएं और शोषण संबंधी सहायता, टीवी उन्मूलन कार्यक्रमों, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत दवाएं और निदान उर्वरक सब्सिडी इत्यादि देने की योजनाओं के तहत सेवाएं उपलब्ध कराने में किया जा सकता है।

facebook शुरू कर रहा लघु ब्यवसाय ऋण पहल –

Online Landing Platform Indify

प्लेटफार्म इंडी (ऑनलाइन लैंडिंग प्लेटफॉर्म इनडिफि) के साथ साझेदारी में भारत में लघु व्यवसाय ऋण पहल स्मॉल बिजनेस लॉन्स इन रेडशिफ्ट लॉन्च किया है। भारत दुनिया का पहला देश है जहां, फेसबुक इस कार्यक्रम को शुरू कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य छोटे और मझोले व्यवसायों की मदद करना है जो, स्वतंत्र ऋण देने वाले भागीदारों के माध्यम से क्रेडिट/ऋण तक त्वरित पहुंच प्राप्त करने के लिए फेसबुक पर विज्ञापन करते हैं। यह छोटे व्यवसायियों के लिए व्यवसाय ऋण को अधिक आसानी से शुलभ बना देगा, और भारत के एमएसएमई (MSME) क्षेत्र के भीतर अंतर को कम करेगा। यह भारत के 200 कस्बों और शहरों में पंजीकृत व्यवसायियों के लिए खुला है।

ज्ञातव्य है कि, इंडीफी पहला उधार देने वाला साझेदार है जिसके साथ फेसबुक में करार किया है और कार्यक्रम को और अधिक भागीदारों को बोर्ड में लाने की क्षमता के साथ बनाया गया है। इंडीफी के साथ फेसबुक की साझेदारी के माध्यम से फेसबुक के साथ विज्ञापन करने वाले छोटे व्यवसायियों को प्रतिवर्ष 17 से 20 प्रतिशत की पूर्व निर्धारित ब्याज दर पर ऋण मिल सकता है। यह कार्यक्रम छोटे व्यवसायियों को त्वरित ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से बिना संपार्श्विक के ऋण के लिए आवेदन करने में सक्षम करेगा।

क्रिप्टो करेंसी (Crypto Currency) निवेश में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर –

ब्लॉकचेन डाटा प्लेटफार्म चैनल एसएसके 2021 ग्लोबल क्रिप्टो एडॉप्शन इंटेक्स के अनुसार भारत वियतनाम के बाद दुनिया भर में क्रिप्टो अपनाने के मामले में दूसरे स्थान पर है। लेकिन अमेरिका यूके और चीन जैसे देशों से आगे है। रिपोर्ट के अनुसार जून 2020 और जुलाई 2021 के बीच दुनियाभर में क्रिप्टो अपनाने में 880% की वृद्धि हुई है।

ज्ञातव्य है कि, अगस्त 2021 में जारी यूएस आधारित शोध मंच फाइंडर की एक रिपोर्ट ने पुष्टि की कि कृपा अपनाने में के मामले में शीर्ष पांच देश एशिया से थे। कंपनी ने दुनिया भर में 47,000 उपयोगकर्ताओं का सर्वेक्षण किया और भारत में सर्वेक्षण करने वालों में से 30% ने कहा कि उनके पास क्रिप्टो करेंसी है। रिपोर्ट के अनुसार बिटकॉइन भारत में सबसे लोकप्रिय आवासी करेंसी है। इसके बाद रिपल (Ripple), एथेरियम (Ethereum) और बिटकॉइन कैश (Bitcoin Cash) हैं।

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HCL Technologie/ एचसीएल प्रौद्योगिकी –

एचसीएल (HCL) टेक्नोलॉजीज 3 ट्रिलियन मार्केट कैप वाली चौथी आईटी फर्म बनी –

अगस्त 2021 में एचसीएल टेक्नोलॉजीज का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पहली बार ₹ तीन लाख करोड़ पर पहुंच गया टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) इंफोसिस और विप्रो के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली एचसीएल चौथे भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी आईटी फर्म बन गई है। एचसीएल टेक के शेयरों ने इंट्रा-डे ट्रेडिंग बीएसई पर 2% की वृद्धि के साथ ₹1,11 8 पॉइंट 5 5 के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया जो, इंट्राडे दिल में 12 अगस्त को पहुंचे ₹1,101 के पिछले अवसर पर को पार कर गया।

टीसीएस और इंफोसिस के बाद एचसीएल टेक राजस्व के हिसाब से तीसरी सबसे बड़ी भारतीय आईटी सेवा कंपनी है। कंपनी की वैश्विक रूप से विविधता पूर्ण उपस्थिति है और, यह एक स्थापित ग्राहक आधार को व्यापक आईटी सेवाएं प्रदान करती हैं। इसकी इंजीनियरिंग और आरडी सेवाओं में मजबूत विशेषज्ञता है और इसके अंतिम ग्राहक उद्योग क्षेत्रों में फैले हुए हैं।

साइबर सुरक्षा मल्टी डोनर ट्रस्ट फण्ड –

विश्व बैंक वर्ल्ड बैंक ने अगस्त 2021 में एक व्यवस्थित तरीके से साइबर सुरक्षा विकास एजेंडा को बेहतर ढंग से चलाने के लिए एक नया साइबर सुरक्षा मल्टी डोनर ट्रस्ट फंड लॉन्च किया है। नए फंड को व्यापक डिजिटल डेवलपमेंट पार्टनरशिप अंब्रेला प्रोग्राम (Digital Development Partnership Umbrella Program) के तहत एक सम्बद्ध ट्रस्ट फंड के रूप में विकसित किया गया है। विश्व बैंक ने फंड लॉन्च करने के लिए 4 देशों एस्टोनिया, जापान, जर्मनी और नीदरलैंड्स के साथ भागीदारी की है। इस नए फंड का मुख्य उद्देश्य वैश्विक ज्ञान के विकास देश के आकलन तकनीकी सहायता क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी में आवश्यक निवेश के साथ विश्व बैंक के सदस्य देशों में साइबर और डिजिटल सुरक्षा क्षमता और योग्यता को बढ़ाना है।

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