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CTS Machine kya hoti hai?

CTS मशीन क्या होती है? और यह किस प्रकार कार्य करती है? आइए जानते हैं?

आपकी जानकारी के लिए आपको बता दूँ की CTS मशीन वह मशीन है, जिसमें चेक CTS मशीन के द्वारा स्कैन करके भेजा जाता है और संबंधित रीजन को या संबंधित ज़ोन को अनलाइन माध्यम से भेजा जाता है।

पहले क्या होता था की, उदाहरण के लिए मान लेते हैं – आपका खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में है, और आपको किसी ब्यक्ति ने पंजाब नैशनल बैंक का चेक दे दिया। अब आपको वो चेक अपने खाते में जमा करना है, यानि की स्टेट बैंक में जमा करना है।

तो जब आप इस चेक को जमा कर देंगे तो अब वो चेक अब वहाँ से फिर दूसरे बैंक जहां का चेक है, यानि पंजाब नैशनल बैंक में, वो एक पत्र या लेटर के साथ चेक को भिजवाते थे। फिर दूसरे बैंक वाले देखते थे की उसके अकाउंट में उतना पैसा है की नहीं जीतने का उसने चेक दिया है। अगर पैसा है तो वो भेज देंगे नहीं तो वो चेक वापस हो जाएगा। वैसे चेक वापस आने के और भी कुछ कारण हो सकते हैं। जैसे की – हस्ताक्षर का न मिलना या MICR कोड का न मिलना, पर्याप्त न होना कुछ भी हो सकता है।

पर आज के समय में ऐंसा नहीं है। अब आप किसी भी बैंक खाते में किसी भी अन्य बैंक का चेक लगा सकते हैं। बसर्ते जिस बैंक का चेक आपके पास आया हो उस बैंक का MICR कोड होना अनिवार्य है। नहीं तो चेक CTS मशीन में नहीं लग पाएगा। हर बैंक का अपना एक MICR कोड होता है। जो चेक क्लेयरिंग में बहुत महत्वपूर्ण होता है।

Cheque Transection System

चेक क्लियरिंग या बैंक क्लीयरेंस उस बैंक से नकदी ले जाने की प्रक्रिया है, जिस पर एक चेक उस बैंक में CTS मशीन में लगाया जाता है, जिसमें इसे जमा किया गया था, आमतौर पर चेक को भुगतान करने वाले बैंक में ले जाया जाता है, या तो पारंपरिक भौतिक (Physical) कागज के रूप में या चेक ट्रांज़ेक्शन सिस्टम के तहत, इस डिजिटल प्रक्रिया को समाशोधन चक्र कहा जाता है। आमतौर पर जमाकर्ता के बैंक खाते में जमा हो जाता है, और बैंक के खाते में एक समान डेबिट होता है।

जिस पर बैंकों के खातों के संबंधित समायोजन के साथ इसे तैयार किया जाता है। यदि जारीकर्ता बैंक के पास चेक के आने पर खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं है, तो चेक को अनादरित चेक (Dishonored Check) के रूप में वापस कर दिया जाएगा, जिस पर अपर्याप्त धनराशि (insufficient funds) अंकित की जाएगी।

इसकी शुरूआत आखिर हुई कहाँ से?

संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) –

सफ़ोक बैंक (Suffolk Bank) ने 1818 में बोस्टन (Boston) में पहला समाशोधन गृह (Clearing House) खोला, और एक 1850 में न्यूयॉर्क में शामिल किया गया था। बैंकरों के लिए एक समाशोधन गृह 1858 में फिलाडेल्फिया (Philadelphia) में खोला गया था।अमेरिकियों ने ब्रिटिश चेक क्लियरिंग सिस्टम में सुधार किया और 1853 में वॉल स्ट्रीट न्यूयॉर्क में, बैंक ऑफ न्यूयॉर्क (Bank of New York) में एक बैंकर्स क्लीयरिंग हाउस, क्लियरिंग हाउस एसोसिएशन खोला।

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Cheque Transection System Machine (CTS) –

यह होता क्या है? चलिए आपको बताते हैं?

जैसे की आप सामने दिख रही फोटो में CTS मशीन को देख सकते हैं। इसमें बैंक चेक को लगाया जाता है और स्कैन किया जाता है। फिर स्कैन होने के बाद चेक आपके सामने स्क्रीन पर प्रस्तुत हो जाएगा और फिर आपको स्कैन हुए चेक और ओरिजनल चेक को आपस में मिलाके देखना है की दोनों में समान डिटेल है की नहीं। अगर डिटेल गलत है तो आपको फिरसे स्कैन करना है और अगर सही है तो फिर आपको sabmit कर देना है।

सामने फोटो में आप देख सकते हैं, जिस प्रकार से चेक को रखा गया है, उसी प्रकार से वो स्कैन होके इसके अंदर से बाहर आता है।

CTS और NON CTS CHAQUE –

चलिए आपको बताते हैं की इन दोनों में अंतर होता क्या है?

आप कभी गौर कीजिएगा जब आपके पास ये दोनों चेक मौजूद होंगे तो आप देखेंगे की जो CTS वाला चेक होगा उसमें नीचे से एक साइड में एक मैगनेटिक बॉक्स बना होगा जिसमें लाइन जैसी भी देखेंगी आपको, या अगर आपको ध्यान होगा तो पहले के समय में जैसे फोन के रिचार्ज, जहां पे खुरचते थे, उसी प्रकार का कुछ देखने को आपको चेक में मिलेगा। इसके अंदर एक मैगनेटिक कोड होता है जिसे सामान्य आँखों से नहीं देखा जा सकता है। उसे सिर्फ CTS मशीन के द्वारा ही रीड किया जा सकता है या पड़ा जा सकता है।

अब हम बात करते हैं उस चेक की जो CTS में नहीं लगता, यानि की NON CTS चेक के बारे में। तो आपको बता दें की दोनों में फर्क बस इतना है की एक में मैगनेटिक कोड होता है और एक में नहीं होता है। जिसे हम NON CTS कहते हैं। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दूँ की आप इस प्रकार के चेक का प्रयोग सिर्फ कैश पेमेंट लेने के लिए कर सकते हैं।

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