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अल्मोड़ा से रानीखेत की दूरी? | अल्मोड़ा कैसे जाएं |

समुद्र तल से 1750 मी. की ऊँचाई पर कुमाऊँ के लगभग केन्द्र में कोसी और सुयाल नदियों के मध्य स्थित वर्तमान अल्मोड़ा नगर वाले स्थान पर 14वीं सदी में भीष्मचंद द्वारा बनाया गया खगमारा किला था। इतिहासकार ई. टी. एटकिन्सन के अनुसार चन्द्र बंश के 43वें राजा भीष्मचन्द्र ने अल्मोड़ा को 1530 में बसाया था और 1563 ई. में राजा बालो चन्द्र ने चम्पावत से अपनी राजधानी यहाँ स्थानांतरित कर इसका नाम मुगल प्रभाव के कारण आलमनगर रखी थी, जिससे बाद में अल्मोड़ा हो गया।

अल्मोड़ा
अल्मोड़ा

1817 ई. में यहाँ रामजे कालेज, छावनी, कचहरी, नार्मल स्कूल आदि बना तथा 1864 में नगरपालिका का गठन हुआ। 1892 में इसे जिला मुख्यालय बनाया गया। कभी इस नगर में 360 नौले थे। वर्तमान में शहर में फोर्टमायरा किला, लालाबाजार, कुणिन्द मूर्तियों व मुद्राओं का संग्रहालय, नंदादेवी मंदिर, टमटयूड़ा (ताबा बर्तन बनाने के लिए प्रसिद्ध) मोहल्ला आदि दर्शनीय हैं। इस नगर के आस-पास डियरपार्क, चितईमंदिर, कसारदेवी मंदिर, सिमतोला, मोहनजोशी पार्क, ब्राइट एंड कार्नर आदि दर्शनीय स्थल हैं। स्वतंत्रता आन्दोलन के समय नेहरू जी अल्मोड़ा कारागार में कुछ दिन बन्द थे ।

अल्मोड़ा से रानीखेत की दूरी?

अल्मोड़ा से रानीखेत की दूरी 46 किलोमीटर है। रानीखेत कुमाऊं का एक बहुत ही सुंदर शहर है जोकि काफी पुराना शहर है यहां पर कुमाऊँ रेजीमेंट का सैन्य कार्यालय तथा छावनी परिषद भी है चौकी बहुत ही प्रसिद्ध है रानीखेत शहर कुमाऊं रेजिमेंट छावनी परिषद के रूप में मुख्य रूप से जाना जाता है।

अल्मोड़ा कैसे जाएं?

उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध हिल स्टेशनों में से एक अल्मोड़ा अपने सुंदर और शांत प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है। दिल्ली से अल्मोड़ा जाने के सभी तरीकों के बारे में, में आपको बताने वाला हूं, ताकि आपको अल्मोड़ा पहुंचने में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी ना हो पाए।

बस से अल्मोड़ा कैसे पहुंचे?

अगर आप बस के माध्यम से अल्मोड़ा ट्रिप पर जाना चाहते हैं, तो आप अपने इस पूरे ट्रिप के सफर को बस से कंप्लीट कर सकते हैं। दिल्ली के आनंद विहार से सीधे अल्मोड़ा जाने के लिए उत्तराखंड रोडवेज की दो आर्डिनरी बसें चलाई जाती है, जिसके खुलने का समय रात 8 और 9 बजे है, जो करीब 12 घंटे में सुबह 8 और 9 बजे अल्मोड़ा पहुंचा देती हैं।

अगर आप दिल्ली के अलावा देश के अन्य शहरों से बिलॉन्ग करते हैं, तो आप अपने सुविधा के अनुसार बस, ट्रेन या फ्लाइट से दिल्ली पहुंच सकते हैं और वहां से बस पकड़ कर अल्मोड़ा जा सकते हैं।

ट्रेन से अल्मोड़ा कैसे पहुंचे?

अल्मोड़ा का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम और हल्द्वानी है, जहां से अल्मोड़ा की दूरी करीब 82 और 89 किमी. है। काठगोदाम और हल्द्वानी दोनों रेलवे स्टेशनों से अल्मोड़ा के लिए उत्तराखंड रोडवेज की आर्डिनरी बसें चलाई जाती हैं, जो इन दोनों रेलवे स्टेशनों से 3-4 घंटे में अल्मोड़ा पंहुचा देती है। अगर आप उत्तराखंड के इन दोनों रेलवे स्टेशनों पर आते हैं, तो वहां से आप बस या टैक्सी (प्राइवेट या शेयर) द्वारा बिना किसी परेशानी के अल्मोड़ा पहुंच सकते हैं।

हवाई जहाज से अल्मोड़ा कैसे पहुंचे?

अगर आप अपने अल्मोड़ा ट्रिप पर फ्लाइट से जाना चाहते हैं, तो आप अपने शहर के सबसे नजदीकी एयरपोर्ट से फ्लाइट द्वारा पंतनगर या पिथौरागढ़ एयरपोर्ट पर पहुंच सकते हैं, जो अल्मोड़ा का सबसे निकटतम एयरपोर्ट है।

पंतनगर और पिथौरागढ़ एयरपोर्ट से अल्मोड़ा जाने के लिए कई सारी उत्तराखंड रोडवेज की बसें चलती है, जिससे आप सही तरीके से अल्मोड़ा पहुंच सकते हैं। पंतनगर और पिथौरागढ़ एयरपोर्ट से अल्मोड़ा की दूरी करीब 116 और 122 किमी. है।

अपनी बाइक या कार से अल्मोड़ा कैसे पहुंचे?

उत्तराखंड की सरकार इस बात पर बहुत अच्छे से ध्यान देती है कि कहीं उत्तराखंड राज्य के सड़कों की स्थिति काफी खराब तो नहीं न हो गई है, क्योंकि उत्तराखंड राज्य की सरकार इस बात को काफी अच्छे से समझती है कि उत्तराखंड भारत का एक ऐसा राज्य है, जिसका नाम भारत के सबसे ज्यादा पर्यटन और धार्मिक स्थलों वाले टॉप 5 राज्यों में शुमार है, जहां पर नदियां, पहाड़, झरने, मंदिर, हिल स्टेशन के अलावा अन्य कई पर्यटन स्थल और हनीमून डेस्टिनेशन मौजूद है।

यही कारण है कि उत्तराखंड के सभी जगहों पर जाने के लिए बहुत अच्छी सड़क बनाई गई है और उन सड़कों की मरम्मत भी समय-समय पर होती रहती है, ताकि पर्यटकों को एक जगह से दूसरे जगह जाने में किसी भी परेशानी का सामना ना करना पड़े।

आप देश के किसी को कोने से अपनी बाइक या कार से अल्मोड़ा ट्रिप पर जाने का प्लान कर रहे हैं, तो आप बेझिझक इस ट्रिप को अपने वाहन यानी बाइक या कार से कंप्लीट कर सकते हैं। उत्तराखंड के सड़क की कंडीशन अच्छी होने की वजह से आप ना सिर्फ अल्मोड़ा, बल्कि उत्तराखंड के सभी जगहों पर अपनी बाइक या कार लेकर जा सकते हैं।

बाइक रेंट पर लेकर अल्मोड़ा कैसे पहुंचे?

अल्मोड़ा जाने के लिए आप उत्तराखंड के प्रमुख शहरों, जहां पर आप देश के किसी भी कोने से ट्रेन, बस या फ्लाइट से पहुंच सकते हैं, से बाइक रेंट करके अल्मोड़ा जा सकते हैं। फ्लाइट, बस या ट्रेन से उतरने के बाद आप बस द्वारा भी अल्मोड़ा पहुंच सकते हैं और वहां से बाइक रेंट करके अपने अल्मोड़ा ट्रिप को कंप्लीट कर सकते हैं।

अल्मोड़ा जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल निम्न प्रकार हैं –

वीरणेश्वर मंदिर –

अल्मोड़ा शहर से 26 किमी. उत्तर बिनसर पहाड़ी पर झंडीधार स्थल पर राजा कल्याण चन्द्र (चतुर्थ) द्वारा निर्मित भगवान शिव का यह मंदिर है। यहाँ से पूरा अल्मोड़ा शहर, हिमालय की कई चोटियां व सूर्यास्त का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। चीतल मंदिर, कसार देवी मंदिर, नंदादेवी मंदिर, गोल्ल मंदिर, ब्राइट एंड कार्नर, डियरपार्क, रामकृष्ण मिशन आदि यहाँ के प्रसिद्ध स्थल हैं।

राम शिला मन्दिर –

यह मंदिर अल्मोड़ा नगर के मध्य में स्थित है। चन्द वंशीय राजाओं के समय यह स्थान मल्ला महल कहलाता था। यहीं उनका अष्ट महल दुर्ग भी रहा। 1588 में इस अष्ट महल दुर्ग के मध्य में राजा रुपचन्द ने इस रामशिला मन्दिर समूह की स्थापना कराई थी।

नन्दा देवी –

अल्मोड़ा नगर में स्थित कुमाऊँ की मध्यकालीन कला की उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध नन्दादेवी परिसर में तीन देवालय हैं। कमिश्नर ट्रेल द्वारा मल्ला महल की नन्दा प्रतिमाओं को पर्वतेश्वर मन्दिर में रखे जाने के पश्चात् यह नन्दादेवी मन्दिर कहलाया। यहाँ प्रतिवर्ष भाद्रपद की अष्टमी को विशाल मेला लगता है।

गणानाथ-

अल्मोड़ा से 47 किमी दूर ताकुला के निकट गणानाथ का शिव मन्दिर एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है। यहाँशिवलिंग पर प्राकृतिक रूप से जल टपकता है। इसकी चोटी पर मल्लिका देवी का मन्दिर है।

कटारमल सूर्य मंदिर –

अल्मोड़ा नगर से लगभग 15 किमी. की दूरी पर पश्चिम की ओर स्थित यह मन्दिर उत्तराखण्ड शैली का है, जिसका निर्माण 9 वीं,10 वीं शताब्दी में राजा कटारमल ने कराया था। र इस मन्दिर में मुख्य प्रतिमा बड़ादित्य सूर्य की है। इसके अलावा त शिव-पार्वती, लक्ष्मी-नारायण, नृसिंह, कुबेर, महिषासुरमर्दिनी आदि न्य की भी मूर्तियाँ हैं।

इस मन्दिर का कपाट वर्तमान में राष्ट्रीय संग्रहालय, नयी दिल्ली में रखा हुआ है जो अपनी विशिष्ट काष्ठ (शिल्प) ड कला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस मंदिर के समीप गोविन्द बल्लभ पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान भी है। यहीं कुमाऊँ क्षेत्र का रणचंडी मंदिर भी है।

चितई मंदिर –

अल्मोड़ा नगर से 12 किमी. की दूरी पर स्थित न इस रहस्यमयी मंदिर की बड़ी मान्यता है। यहाँ के गुल्लू या गोलू देवा मनोकामना को बहुत शीघ्र पूरा करने के साथ न्याय भी शीघ्र देते हैं। इस स्थल को परमोच्च न्यायालय माना जाता है।

सोमेश्वर –

अल्मोड़ा-कौसानी मार्ग पर अल्मोड़ा से 40 किमी. की दूरी पर स्थित इस मन्दिर का निर्माण 700 ई. में राजा सोमचन्द ने कराया था। यहाँ की गई पूजा काशी विश्वनाथ में की गई पूजा के न र तुल्य मानी जाती है। इस मन्दिर के पास एक प्राचीन नौला भी है। किवदंती है कि कभी यह नौला दूध का एक कुण्ड था लेकिन जूठा हो जाने पर यह पानी में बदल गया ।

शीतलाखेत –

यह स्थान अल्मोड़ा से 35 किमी दूर रानीखेत व अल्मोड़ा के मध्य में स्थित है। यहां पर स्याही देवी का प्रसिद्ध मन्दिर है। यहां पर प्रायः स्काउटिंग के कैम्प भी लगते रहते हैं। भारत रत्न पं. गोविन्द बल्लभ पन्त का जन्म स्थल (ग्राम खूंट) यहां से मात्र 3 किमी दूरी पर स्थित है। यहाँ अनेक प्रकार के फलों के बाग मिलते हैं। यहाँ से 4 किमी. की दूरी पर प्राचीन स्याही देवी का मंदिर है।

जालना-

अल्मोडा से 35 किमी की दूरी पर स्थित जालना हिमालय के विशाल मनोरम दृश्यों को प्रदान करता है। यहाँ पर विविध के फलों जैसे खुबानी, सेब, नाशपाती, आडू, आलू बुखारा इत्यादि का विशाल उत्पादन होता है।

जागेश्वर मंदिर समूह –

अल्मोड़ा नगर से 35 किमी. की दूरी पर जटागंगा के किनारे 124 छोटे-बड़े मन्दिरों का समूह, जिनमें 25 अभी भी ठीक अवस्था में हैं, स्थित है। यह राज्य का सबसे बड़ा मंदिर समूह है। पुरातत्वविदो के अनुसार यहाँ पहले 150 मंदिर थे। इसे उत्तराखण्ड का पांचवा धाम कहा जाता है। हिन्दुओं का यह पवित्र धार्मिक स्थल देवदार के वृक्षों के बीच संकरी घाटी में है।

8वीं से 10वीं शती में निर्मित इन कलात्मक मन्दिरों का निर्माण कत्यूरी राजा शालिवाहन देव ने कराया था। यहाँ जागनाथ, महामृत्युंजय, पंचकेदार, डंडेश्वर, कुबेर, लक्ष्मी व पुdष्टि देवी के मन्दिर प्रमुख हैं। यहाँ का सबसे प्राचीन मंदिर मृत्युंजय मंदिर व सबसे विशाल मंदिर दिनदेशवारा है। यहाँ के प्रायः सभी मंदिर केदारनाथ शैली में निर्मित हैं। यहाँ से कुछ ही दूरी पर उत्तर में प्राचीन वृद्ध जागेश्वर मंदिर हैं।

द्वाराहाट मन्दिर समूह-

अल्मोड़ा से 138 किमी की दूरी पर स्थित द्वाराहाट, हिमालय की द्वारिका के नाम से जानी जाती है। यह कत्यूरी राजाओं के कलाप्रेमी एवं धर्मनिष्ठा का प्रतीक है। उन्होंने 11वीं, 12वीं सदी में यहां 30 मन्दिरों एवं 365 बावड़ियों का निर्माण करवाया था। महापण्डित राहुल सांस्कृत्यायन ने इन मन्दिरों का निर्माण काल 11वीं तथा 12वीं शताब्दी बताया है।

इस मन्दिर समूह में सबसे बड़ा व उत्कृष्ट देवालय गुजरदेव का मन्दिर है। अन्य मन्दिरों में भगवान बदरीनाथ और केदारनाथ के मन्दिर प्रमुख हैं। मन्दिर के तीन समूह-कचहरी, मनिया और रत्नदेव के नाम से प्रसिद्ध हैं।

विभाण्डेश्वर –

द्वाराहाट से लगभग 5 किमी. दक्षिण की ओर स्थित विभाण्डेश्वर मन्दिर को स्थानीय लोग ‘उत्तर का काशी’ मानते हैं। विषुवत् संक्रांति के अवसर पर यहां स्याल्दे बिखौती का प्रसिद्ध मेला लगता है।

दूनागिरि-

द्वाराहाट से 14 किमी की दूरी पर दूनागिरी का मन्दिर हैं। पुराणों के अनुसार दूनागिरी ही द्रोणांचल पर्वत है। यह मंदिर वैष्णवीं
शक्ति पीठ है। इस मन्दिर की स्थापना सन् 1183 में हुई थी।

रानीखेत –

झूलादेव पर्वत श्रृंखला पर पर्यटको की नगरी रानीखेत अल्मोड़ा से लगभग 50 किमी दूर स्थित है। शान्त एवं सुन्दर प्रकृति का यह छावनी नगर अपनी स्वास्थ्यवर्धक जलवायु, सुहावनी समीर, मनोहर हिमालयी दृश्यों एवं चीड़-बांज के हरे भरे क्षेत्रों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ नीचे गगास नदी बहती है और पास ही नागदेव ताल भी है। यहाँ सेना के कुमाऊँ रेजीमेन्ट का मुख्यालय एवं एक संग्रहालय है।

यह समुद्रतल से 6000 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। कहा जाता है कि कत्यूरी शासक राजा सुधांगदेव की रानी पद्मिनी ग्रीष्मकाल में आकर यह रहती थीं। जहां पर वह रुकती थीं वहां पर खेत था। बाद में वह खेत रानीखेत नाम से प्रसिद्ध हो गया। अंग्रेजों द्वारा 1869 में आधुनिक रानीखेत की स्थापना हुई।

उत्तराखंड का सर्वोत्तम हिल स्टेशन कौन सा है?

अमेरिका के न्यायाधीश विलियम दोगल्स ने इसे विश्व का सर्वोत्तम हिल स्टेशन माना है। तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय लार्ड मेयो को रानीखेत अति प्रिय था। रानीखेत में स्थित दर्शनीय स्थल हैं- मन कामेश्वर मन्दिर, हनुमान मन्दिर, झूला देवी मन्दिर, शिव मन्दिर, कालिका मंदिर, चौबटिया, भालू बांध, हैड़ाखान मंदिर, ताड़ीखेत, शीतलाखेत, मंजखाली व नागदेव ताल आदि।

चौबटिया –

चौबटिया रानीखेत से 10 किमी की दूरी पर स्थितहै। इसे ‘ऑर्चर्ड कन्ट्री (फलोद्यान के देश) के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ फल संरक्षण एवं शोध केन्द्र है। सरकारी सेब बगान हैं। यहां से हिमालय का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।

झूला देवी राम मंदिर-

झूला देवी राम मंदिर रानीखेत से 7 किमी की दूरी पर चौबटिया मार्ग पर स्थित है। यह स्थान दुर्गा देवी तथा भगवान राम के मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। रानीखेत से 8 किमी दूर स्थित यह स्थान गांधी 1 कुटी तथा गोरिल देवता के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।

चौखुटिया-

कत्यूरी राजवंश के किला अवशेष तथा काली व वैष्णों मंदिर के लिए प्रसिद्ध यह स्थल रानीखेत से 54 किमी. की दूरी पर रामगंगा के तट पर स्थित है। यहाँ से मात्र 18 किमी. की दूरी पर द्वाराहाट है।

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