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5G के फायदे और नुकसान?

5G के फायदे और नुकसान – हर 10 साल में नई मोबाइल टेक्नोलॉजी आ जाती है। जो मोबाइल टेक्नोलॉजी को एक नहीं शिखर पर पहुंचा देती है। सबसे पहले आया था 1G जो 1980 के दशक में लॉन्च किया गया था और इसकी वजह से सेल फोन पर बात हो पाती थी। 1G की मदद से ही वॉइस कॉल का जमाना आया था और यह मोबाइल के क्षेत्र में एक नया आयाम था।

इसके बाद आया 2G जो एनालॉग सिग्नल की जगह नई टेक्नोलॉजी के डिजिटल सिग्नल से कॉल और मैसेज की सुविधाएं प्रदान करता था। 2G 1980 के दशक में लॉन्च हुआ था और इसकी खास बात यह थी की इसमें कॉल और मैसेज दो लोगों के बीच में रहती थी और बीच में उसको कोई सुन या पढ़ नहीं पाते थे। यह फीचर 1g में मौजूद नहीं था। 2G पहला ऐसा कदम था जहां पर प्राइवेसी को इंपॉर्टेंस दी गई थी।

3G की शुरूआत कब हुई?

इसके बाद 1998 में 3G नेटवर्क की शुरुआत हुई और इसने ही पूरी दुनिया को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया यानी कि 3जी के आने से दुनिया में इंटरनेट के क्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला। आज सुबह उठने से लेकर रात सोने तक जो भी कॉल, मैसेज, वीडियो कॉल, ऑनलाइन मैसेज यह सभी की शुरुआत इसी की देन है। यहीं से इंटरनेट की दुनिया की शुरुआत हुई थी। 3G में एक नई तरह की कॉलिंग टेक्नोलॉजी आई थी जिसमें से आज हम वीडियो कॉलिंग और ऑडियो कॉलिंग के नाम से जानते हैं।

यह भी पढ़ें : इंटरनेट को कंट्रोल कौन करता है?

4G की शुरूआत कब हुई?

इसके बाद 2008 में 4G की शुरुआत हुई, जिसने इंटरनेट की स्पीड को और भी बढ़ा दिया और उसके साथ एचजीटीवी और गेमिंग जैसे फीचर्स को भी इनेबल कर दिया 4G की मदद से ही स्मूथ गेमिंग की जा सकती है और इसकी मदद से ही हम एचडी टीवी में वीडियोस को इंजॉय कर पाते हैं।

5G क्या है? आइए जानते हैं?

अब हम बात करते हैं 5जी की। जो, 2019 में फैलना शुरू हो गया था। इससे 1g, 2G, 3G, 4G के द्वारा किए गए काम तो किए ही जा सकते हैं साथ ही इसमें मशीन टू मशीन कम्युनिकेशन का एक नया फीचर भी आ गया है। जिसके बारे में कंपनी अब आगे प्रचार और प्रसार करेंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि 5G की स्पीड 4G से 100 गुना ज्यादा हो सकती है और इसमें इंफॉर्मेशन की ट्रैवल करने की स्पीड बहुत ही ज्यादा तेज होगी।

5G टेक्नोलॉजी को “इंटरनेट ऑफ थिंग्स” कहा जाएगा क्योंकि, यह कार से लेकर बाइक तक हर जगह इस्तेमाल में आएगा। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि, आज के समय में इंटरनेट जानकारी लेने और देने का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। अब कोई भी जानकारी हमसे बस सिर्फ एक सर्च दूर है। लेकिन इसे चलाते और इस्तेमाल करते समय एक बात का ध्यान अवश्य रखें कि, इंटरनेट पर दिखाई गई हर जानकारी सही नहीं होती।

आजकल ऐसी ही एक जानकारी इंटरनेट पर बहुत ही तेजी से फैल रही है और वह जानकारी यह है कि 5जी की वजह से बहुत ही नुकसान होने वाला है या मानव जीवन के लिए जहां इससे इतना फायदा है इससे उतना नुकसान भी है।

4G और 5G में अंतर क्या है?

दरअसल 4जी और 5G में G का मतलब “जनरेशन” होता है।,यह दोनों ही मोबाइल नेटवर्क हैं जो इंटरनेट को आप तक पहुंचाते हैं। मोबाइल नेटवर्क तीन चीजों से मिलकर बने होते हैं और उनमें से किसी भी एक चीज ना होने की वजह से पूरा सिस्टम खराब या गड़बड़ हो जाता है।


सबसे पहला पार्ट होता है रेडियो एसएस नेटवर्क। दरअसल यही वह पार्ट होता है जिससे आपका फोन कनेक्ट होता है। इसके एंटीना आपके शहर में छतों के ऊपर देखने को मिल जाते हैं और टावर के ऊपर भी एंटीना लगे होते हैं। इसके बाद आता है हमारा कोर नेटवर्क। जो मोबाइल नेटवर्क का सबसे महत्वपूर्ण पार्ट होता है। इसी पार्ट की वजह से आप जिसे मैसेज करना चाहते हैं या फोन करना चाहते हैं यह इसी की वजह से संभव हो पाता है। अंत में आता है ट्रांसपोर्ट नेटवर्क जो, रेडियो एसएस नेटवर्क और कोर नेटवर्क को आपस में जोड़ने का कार्य करता है।

अब बात करते हैं उस पार्ट की जिसकी वजह से कई लोग डरे बैठे हैं सिर्फ यह सोचकर कि उससे इंसान को बहुत नुकसान हो सकता है। हम मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस से निकलने वाले वेब्स की बात कर रहे हैं जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में रेडियो वेव्स कहा जाता है। क्योंकि, यह सबसे पहले रेडियो डिवाइसेज के द्वारा छोड़ी गई थी।

इन वेब्स का कम्युनिकेशन में 120 साल से भी पहले से यूज किया जा रहा है। रेडियो वेव्स भी लाइट्स की तरह इलेक्ट्रॉनिक मैग्नेटिक वेब्स होती हैं। जो फोटोन नाम के पार्टिकल से मिलकर बनी होती है। रेडियो वेव्स की frequency लाइट की frequency से कई गुना कम होती है। इसका मतलब है कि, यह आसानी से किसी भी कोने में जा सकती है और किसी दीवार या बिल्डिंग के आर-पार भी हो सकती है जो लाइट नहीं कर सकती और इसी कारणों की वजह से इसे कम्युनिकेशन में यूज किया जाता है।

अब आप समझ ही गए होंगे कि, जब आप एक बंद कमरे में भी होते हैं तो तब भी हम किसी से बात कैसे कर पाते हैं या नेट कैसे चला पाते हैं। इतनी बेसिक जानकारी यही समझने के लिए काफी है कि आखिर 5जी के क्या नुकसान हैं? 5G के आने की वजह से बैंडविड्थ बहुत बढ़ जाएगी।

बैंडविड्थ (Bandwidth) क्या होती है?

बैंडविड्थ मिर्च का मतलब होता है “किसी भी वेब को ट्रैवल करने के लिए जरूरी जगह”। जब 4G का जमाना था तब, कम टावर में ज्यादा बड़े एरिया को कवर किया जा सकता था क्योंकि, तब बैंडविड्थ कम थी और कम ही लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे। इसके बाद आया 4G जिसने बैंडविथ के एरिया को और भी कम कर दिया यानी कि अब आपको नेटवर्क को पहुंचाने के लिए ज्यादा टॉवर्स की जरूरत पड़ने लग गई।

और अब 5G के आने की वजह से एक टावर बहुत ही कम दूरी तक ही नेटवर्क को पहुंचा पाएगा। जिसका मतलब यह है कि 5जी की वजह से टावर्स की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। 5G के आने से टावर बहुत ही कम दूरी तक ही नेटवर्क को पहुंचा पाएगा। जिसका मतलब यह है कि, टावरों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी।

5G के नुकसान क्या हैं?

जैसे कि मैंने शुरू में बताया कि नेटवर्क रेडियो वेव्स एसएस पर काम करते हैं फिर चाहे वह 4G हो या फिर चाहे 5G। 5G नेटवर्क में 6 गीगाहर्टज की Radio-frequency का इस्तेमाल किया जाएगा और परेशानी खड़ी करने वाली बात यह है कि इसी frequency की रेडियो वेव्स को सेटेलाइट में भी यूज किया जाता है। जिसका मतलब यह है कि आने वाले समय में जब 5G का इस्तेमाल ज्यादा हो जाएगा। तब यह रेडियो वेव्स आपस में डिसेक्ट करने लगेंगी। जिससे या तो सेटेलाइट कम्युनिकेशन को नुकसान होगा या ऐसा भी हो सकता है कि, यह दोनों ही एक दूसरे के लिए परेशानियां खड़ी कर दें।

ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 2025 तक 2.6 बिलियन कस्टमर 5G के हो जाएंगे। तब 125 बिलियन डिवाइस को 5G के द्वारा चलाया जाएगा जो हमारे पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं है। अगर वाकई में ऐसा हुआ तो दुनिया का 14% ग्लोबल वार्मिंग का हिस्सेदार यही रहेगा। इसका सबसे बड़ा नुकसान जानवरों यानी कि पक्षियों के इको-सिस्टम में खासकर बदलाव आये हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी के द्वारा किए गए एक रिसर्च से पता चलता है कि जब sparrow यानी कि गौरैया के अंडों को 5G के टावर के आसपास रखा गया तो, उसके अंडे के आकार में बदलाव पाया गया और यह सिर्फ 5 मिनट से 30 मिनट के बीच में ही हुआ। यह सब 5G की रेडिएशन की वजह से ही हुआ था।

स्पेन में भी इस बात पर रिसर्च की गई जिसमें पता चला कि 5G नेटवर्क के रेडिएशन की वजह से पक्षियों के घोंसले बनाने की शक्ति भी कम हो रही थी और अपने बच्चों को ढूंढने की शक्ति भी कम हो रही थी। जब 5G कि रेडिएशन पक्षियों पर असर करती है तो इसकी वजह से वह अपने घर का रास्ता तक भूल जाते हैं और जो पक्षी हर साल एक जगह से दूसरी जगह माइग्रेट करते हैं वह भी ऐसा नहीं कर पाएंगे। इसकी वजह से कई पक्षियों के विलुप्त होने के भी आसार हैं। इसी तरह 4G के आने से गौरैया का दिखना बंद हो गया था। 5G का असर सिर्फ पक्षियों को ही नहीं बल्कि मधुमक्खियों पर भी असर होता है। जब मधुमक्खियों को 5G रेडिएशन का सामना करना पड़ा तो, वह अपने घर को भूल जाते हैं और यहां तक कि उनकी मृत्यु भी हो जाती है।

5G से क्या-क्या फायदे होंगे?

5G का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि यह इंटरनेट जगत में होने वाला एक बहुत बड़ा बदलाव होगा। क्योंकि, 3G और 4G के मुकाबले इसमें कई गुना ज्यादा स्पीड होगी। इससे काम चुटकियों में होंगे। आपको काम करने में एक अच्छी इंटरनेट स्पीड मिलेगी। इससे समय की भी बचत होगी क्योंकि, मान लीजिए आपको जहां पहले 3G, 4G इंटरनेट से एक काम करने में 5 मिनट लगते थे वहीं अब 5जी इंटरनेट के आते ही यह काम चुटकियों में हो जाएगा और इससे काम करने में भी काफी आसानी होगी।

5जी से आपको गेमिंग में एक अच्छी गति मिलेगी। जिससे आपको ऑनलाइन गेमिंग खेलने में बहुत ही मजा आएगा। साथ ही इससे डाउनलोडिंग करने में भी अच्छी स्पीड मिलेगी। मान लीजिए आपको कोई वीडियो ऑडियो या कोई मूवी डाउनलोड करनी है तो जहां पहले यह काफी टाइम में डाउनलोडिंग होती थी वही 5जी के आते ही यह चुटकियों में हो जाएगा और आप ऑडियो वीडियो और मूवी को चुटकियों में डाउनलोड करके अपने फोन में या लैपटॉप में सेव कर सकते हैं। और इससे संचार सुविधा या ऑनलाइन मार्केटिंग में काफी फरक पड़ जाएगा। क्योंकि अगर इंटरनेट स्पीड अच्छी होगी तो काम करने में भी मजा आएगा जिससे किसी को भी काम करने में कोई बाधा नहीं आएगी।

E-West क्या होता है? और इसका मनुष्य जीवन पर क्या असर होगा?

E-Weast (Electronic Weast) –

हालांकि, इससे इंसानों पर सीधा कोई दुष्प्रभाव तो नहीं है। लेकिन कई वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे ई वेस्ट यानी इलेक्ट्रॉनिक चीजों के द्वारा किए गए वेस्ट की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाएगी। क्योंकि मार्केट में जब नये-नये 5G फोन आ जाएंगे तो लोग 4G को छोड़कर 5G फोन खरीद लेंगे। जिससे पुराने फोन वेस्ट में चले जाएंगे। ई-वेस्ट से भी बहुत ही हार्मफुल रेडिएशन निकलता है जो, जानवरों को नुकसान पहुंचाती है। जब तक ये ई-वेस्ट पृथ्वी पर रहेंगे हमें नुकसान पहुंचाते रहेंगे।

खैर 5जी से इंसान को खतरा नहीं है। लेकिन सेल फोन के आस-पास होने से रेडिएशन की वजह से शरीर का तापमान बढ़ेगा जिससे, उस एरिया के सेल्स डिस्ट्रॉयड हो सकते हैं। इससे इंसानों पर कुछ खास असर नहीं होगा। यह दावा 240 वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा किया गया है। उसमें यह बात भी बताई गई है कि अभी 5G के बारे में ज्यादा कुछ कहा नहीं जा सकता। इसके मार्केट में आने के 3-4 साल बाद अच्छे और बुरे असर अपने आप सामने आने शुरू हो जाएंगे।

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