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चार धाम यात्रा गाइड | कुल खर्चा

आज हम आपको उत्तराखण्ड में स्थित 4 धामों यानी केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा की पूरी जानकारी देंगे कि आपको किस प्रकार इस यात्रा की प्लानिंग करनी चाहिए जैसे कि आपको कब यह यात्रा करनी चाहिए, कितने दिन का स्टे प्लान बनाकर चले, खाने पीने और ठहरने की क्या व्यवस्था होगी और इस यात्रा का कुल खर्चा कितना आयेगा।

चार धाम यात्रा गाइड
चार धाम यात्रा गाइड

चार धाम यात्रा का उचित समय –

उत्तराखण्ड में सर्दियों में स्नोफॉल की वजह से लगभग 6 महीने तक चारों धाम के कपाट बंद रहते हैं, अतः आपके पास 4 धाम यात्रा के लिए 5 से 6 महीने यानी मई से लेकर अक्टूबर – नवंबर तक का समय होता है। यदि आप पीक सीजन यानि मई जून के समय यात्रा करते हैं तो आपको चीजों के दाम बहुत बड़े हुए मिलेंगे और साथ ही भीड़ भी होती है। अगर आप भीड़ भाड़ को अवॉइड करना चाहते हैं तो आप सितंबर अक्टूबर में यात्रा कर सकते हैं। साथ ही मानसून के समय में भी आप अपनी चार धाम यात्रा को अवॉइड करें क्योंकि इस समय यहां पर लैंडस्लाइड का खतरा बना रहता है।

चार धाम यात्रा कैसे करें और कितने दिन का ट्रिप प्लान करें?

चार धाम की यात्रा में सबसे पहले यमुनोत्री की यात्रा की जाती है इसके बाद क्रमशः गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा की जाती है। अगर आप दूसरे शहरों से बाय ट्रेन आ रहे हैं तो आपको सबसे पहले हरिद्वार पहुंचना होगा और अगर आप बाय फ्लाईट आरहे हैं तो आपको देहरादून एअरपोर्ट आना होगा।

दोनों ही जगह से आपको बस उपल्ब्ध हो जायेगी। इसके अलावा आप प्राईवेट टैक्सी का पैकेज भी ले सकते हैं। अगर बात करें ट्रिप प्लान की तो हम आपको 11 से 15 दिन प्लान में चार धाम यात्रा का कंप्लीट विवरण देंगे। ये दिन 4 धाम यात्रा के लिए पर्याप्त होंगे।

पहले दिन आपको हरिद्वार से बड़कोट (उत्तरकाशी) की ओर निकलना होगा, और पहले दिन आपको यहीं पर स्टे करना होगा। हरिद्वार से बड़कोट को दूरी लगभग 180 किलोमिटर है जिसे तय करने में 6 से 7 घंटे लग जायेंगे। बड़कोट में ठहरने के लिए आपको बहुत से होटेल्स, जीएमवीएन का गेस्ट हाउस आदि मिल जायेंगे। GMVN गेस्ट हाउस में आप रुम की बुकिंग यहां की ऑफिशियल वेबसाइट www.gmvn.online.com से कर सकते हैं। साथ ही प्राइवेट होटल्स में स्टे का कॉस्ट लगभग 500 से 2000 रुपए तक होगा। और खाने पीने का खर्चा भी 80 से 100 रुपए प्रति व्यक्ति तक होगा।

दूसरे दिन आपको बड़कोट से यमुनोत्री के दर्शन के लिए निकलना होगा। इसके लिए आपको पहले बड़कोट से लगभग 44 किलो मीटर दूर स्थित जानकी चट्टी जाना होगा । फिर यहां से 6 किलो मीटर पैदल दूरी तय करके आप यमुनोत्री पहुंच जायेंगे जिसमे 5 से 6 घंटे लग जायेंगे। फिर दर्शन करके आपको फिर से बड़कोट वापस आना होगा और दूसरे दिन भी यहीं पर स्टे लेना होगा।

तीसरे दिन आपको बड़कोट से गंगोत्री धाम की ओर निकलना होगा। इसके लिए आपको पहले उत्तरकाशी जाना होगा जो की यहां से 90 से 100 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है, और तीसरे दिन का स्टे आपको यहीं पर लेना होगा क्योंकि यहां पर और भी दर्शनीय स्थल है जहां आप जा सकते हैं ।

उत्तरकाशी पहुंचने में आपको 3 से 4 घंटे लग जायेंगे। रहने और खाने पीने की व्यवस्था आपको बड़कोट के ही जैसे कॉस्ट पर देखने को मिलेगी। उत्तरकाशी पहुंचने पर आप यहां की लोकल साइट्स पर विजिट कर सकते हैं।

चौथे दिन आपको सुबह ही गंगोत्री दर्शन के लिए निकलना होगा। उत्तरकाशी से गंगोत्री धाम की दूरी लगभग 100 किलो मीटर है। गंगोत्री दर्शन के बाद यदि आप गोमुख यानी गंगा नदी का उद्गम स्थल जाना चाहते हैं तो आपको 16 किलो मीटर पैदल दूरी तय करनी होगी।

इसके लिए आपको अपने स्टे प्लान में एक दिन और एड करना होगा क्योंकि 16 किलो मीटर ट्रैक में आपको बहुत ज्यादा समय लग जाएगा। साथ ही इसके लिए आपको पहले फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से परमिट लेना होगा और आपका फिजिकली फिट होना भी आवश्यक है। इसके बाद आप वापस लौटकर उत्तरकाशी में स्टे ले सकते हैं।

अगले यानी छटवे दिन आपको उत्तरकाशी से सोनप्रयाग की यात्रा करनी होगी, यानी चार धाम यात्रा में तीसरा धाम केदारनाथ की ओर प्रस्थान करना होगा। उत्तरकाशी से सोनप्रयाग की दूरी लगभग 220 किलोमिटर है जिसे तय करने में 10 से 12 घण्टे का समय लग जाएगा। इसके बाद आपको सोनप्रयाग में ही स्टे लेना होगा।

सातवें दिन आपको सुबह सुबह उठ कर केदारनाथ की ओर प्रस्थान करना होगा। इसके लिए पहले आपको सोनप्रयाग से 5 किलोमिटर दूर स्थित गौरीकुंड पहुंचना होगा और इसके बाद पैदल यात्रा करनी होगी। इस पैदल यात्रा की दूरी लगभग 16 किलो मीटर है जिसे तय करने में 6 से 8 घण्टे का समय लग जाएगा। ये यात्रा आप हेलीकॉप्टर, घोड़े – खच्चर आदि के माध्यम से भी तय कर सकते हैं। दर्शन के बाद आप यहां के अन्य स्थान पर भी जा सकते हैं इसके लिए आपको केदारनाथ में ही स्टे लेना होगा।

आठवें दिन आपको केदारनाथ से वापस लौटकर सोनप्रयाग आना होगा और आप आठवें दिन यहीं पर स्टे ले सकते हैं। क्योंकि ट्रैकिंग की वजह से बहुत थकावट हो जाती है।

अगले यानी नवें दिन आपको बद्रीनाथ धाम की ओर निकलना होगा। अगर आप टैक्सी का पैकेज नही लिए हैं तो आपको सोनप्रयाग से ही बदरीनाथ के लिए बस अवेलेबल हो जायेगी। सोनप्रयाग से बद्रीनाथ की दूरी लगभग 220 किलोमिटर है जिसे तय करने में 10 से 12 घण्टे लग जाते हैं। बद्रीनाथ धाम के लिए आपको किसी प्रकार की पैदल दूरी तय नहीं करनी होती है और आपको मंदिर के पास ही स्टे करने के लिए gnvn गेस्ट हाउस और कई होटल्स मिल जायेगे। तो आप नवें दिन यही पर स्टे ले सकते हैं।

दसवें दिन सुबह उठकर आप बद्रीनाथ मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। इसके साथ ही आप यहां के अन्य स्थानो पर भी जा सकते हैं। इसके बाद आप चाहे तो यहीं पर एक दिन स्टे ले सकते हैं या फिर यहां से रूद्रप्रयाग जा कर वहां पर स्टे ले सकते हैं।

ग्याहरवे दिन आप रूद्रप्रयाग से हरिद्वार तक की यात्रा करें और थी पर स्टे ले सकते हैं। और फिर अगले दिन सुबह अपने शहर के लिए रवाना हो सकते हैं।

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